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उत्तराखंड में भूकंप के तेज झटके, रिक्टर स्केल पर 4.0 रही तीव्रता

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 16, 2023, 01:59 PM IST

Earthquake: दिल्ली एनसीआर के बाद उत्तराखंड में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। बता दें, इससे पहले रविवार को करीब 4 बजे दिल्ली-एनसीआर में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर स्कूल पर भूकंप की तीव्रता 3.1 मापी गई थी।

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पिथौरागढ़ में भूकंप के झटके

Photo : iStock

Earthquake Today: दिल्ली-एनसीआर के बाद उत्तराखंड में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से 48 किमी उत्तर पूर्व में भूकंप आया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.0 मापी गई। भूकंप का केंद्र पिथौरागढ़ में पांच किलोमीटर गहराई में था।

बता दें, इससे पहले रविवार को करीब 4 बजे दिल्ली-एनसीआर में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर स्कूल पर भूकंप की तीव्रता 3.1 मापी गई थी। नेशनल सेंटर ऑफ सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र हरियाणा का फरीदाबाद था।

भूकंप की तीव्रता और केंद्र का क्या है मतलब

भूकंप तब आता है, जब पृथ्वी के अंदर प्लेट्स आपस में टकराती हैं। इनसे एक ऊर्जा निकलती है, जिससे हमें कंपन महसूस होता है। भूकंप का केंद्र उस स्थ्ज्ञान को कहते हैं, जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल होने से भूगर्भीय ऊर्जा निकालती है। यह वही स्थान होता है, जहां पर कंपन सबसे ज्यादा महसूस किया जाता है। आगे बढ़ने के साथ इसका प्रभाव भी कम होता चला जाता है। हालांकि, रिक्टर स्केल पर जब 7 या इससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है, जो 40 किलोमीटर तक क्षेत्र में तेज झटके महसूस किए जा सकते हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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