Yogi Aditya Nath Interacts With Shopkeepers: आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ की सड़कों पर उतरे और बाजारों में पहुंचे। इस दौरान व्यापारियों से संवाद किया। उन्होंने जीएसटी रिफॉर्म से संबंधित पंपलेट और बैनर वितरित किए। सीएम ने दुकानदारों और ग्राहकों से संवाद भी किया। व्यापारियों और उपभोक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री के प्रति आभार जताया। सीएम योगी ने कहा कि यह रिफॉर्म भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक थे और देश को महंगाई से राहत देने की दिशा में बड़ा कदम साबित होंगे।
दरअसल, शारदीय नवरात्रि के पहले दिन से लागू हुए ‘नेक्स्ट जेन GST रिफॉर्म’ के बाद बाजार में आये बदलाव का फायदा व्यापारियों को कैसे मिल रहा है, यह जानने के लिए ही सीएम लखनऊ के बड़े बाजार हजरतगंजके पहुंचे और दुकान-दुकान जाकर दुकानदारों से बात की।
नेक्स्ट जेन GST रिफॉर्म से बाजार में उत्साह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुकानदारों से संवाद के बाद हजरतगंज में ही यूनिवर्सल बुकसेलर के पास पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि घटे हुए जीएसटी रेट्स से आम उपभोक्ता, व्यापारी और उद्यमी सभी वर्गों को बड़ा लाभ मिल रहा है। इस रिफॉर्म ने जहां उपभोक्ताओं को राहत दी है, वहीं बाजार की मजबूती और रोजगार सृजन का मार्ग भी प्रशस्त किया है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के मामले में देश का सबसे बड़ा राज्य होने के कारण जीएसटी रिफॉर्म का सबसे अधिक लाभ यूपी के व्यापारियों और ग्राहकों को होगा।
त्योहारी सीजन में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री ने बताया कि विद्यार्थियों के लिए नोटबुक, पेंसिल और अन्य शैक्षणिक सामग्री पर जीएसटी शून्य कर दिया गया है। इसी तरह ज्यादातर घरेलू उपयोग की आवश्यक सामग्रियों को जीरो या 5 प्रतिशत के दायरे में लाया गया है। जीवन रक्षक 33 प्रकार की दवाओं को भी पूरी तरह से जीएसटी से मुक्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि बाजार में खपत बढ़ने से उत्पादन में वृद्धि हुई है। इससे व्यापारी और उद्यमी दोनों को लाभ हुआ है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुले हैं। त्योहारों के सीजन में यह बड़ा कदम उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आया है।
अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता राज्य है और इस रिफॉर्म से यहां की अर्थव्यवस्था को विशेष मजबूती मिलेगी। सीएम ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद देश का कलेक्शन 7 लाख करोड़ से बढ़कर 22 लाख करोड़ तक पहुंचा है, जबकि यूपी में यह 49 हजार करोड़ से बढ़कर 1.15 लाख करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है।
