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'ट्रंप के बार-बार भारत का अपमान करने पर चुप क्यों हैं प्रधानमंत्री?' कांग्रेस ने पीएम मोदी से पूछे सवाल

USAID Funding Row: यूएसएड विवाद को लेकर कांग्रेस ने पीएम मोदी से तीखे सवाल पूछे हैं। कांग्रेस ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाया और ये कहा कि ट्रंप के बार-बार भारत का अपमान करने पर प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं? कांग्रेस नेता ने कहा, 'कहीं ऐसा तो नहीं अदाणी के लिए रहम की भीख मांगने के चक्कर में देश के आत्मसम्मान से समझौता किया गया है?'

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पीएम मोदी पर जयराम रमेश का तंज।

Congress Slams PM Modi: अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए अमेरिकी एजेंसी (यूएसएड) के अनुदान को लेकर जारी विवाद के बीच, कांग्रेस ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर 'अमेरिका से फर्जी खबरें फैलाकर राष्ट्र विरोधी कार्य करने' का आरोप लगाया। विपक्षी दल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी जवाब देना होगा कि जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अरबपति एलन मस्क बार-बार भारत का अपमान कर रहे हैं, तो सरकार चुप क्यों है। हालांकि, भाजपा ने कांग्रेस के ऐसे सभी आरोपों को खारिज किया है और राहुल गांधी को 'देशद्रोही' करार देते हुए उनपर भारत को कमजोर करने की कोशिश में विदेशी ताकतों के साथ साठगांठ करने का आरोप लगाया है।

झूठों और अनपढ़ों की बारात है भाजपा; कांग्रेस का दावा

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, 'भाजपा झूठों और अनपढ़ों की बारात है। जिस 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर पर भाजपाई और चरणचुंबक उछल रहे थे, वो खबर तो फर्जी निकली। वर्ष 2022 में 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर, भारत में ‘मतदान प्रतिशत बढ़ाने’ के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश के लिए थे।' रमेश ने आरोप लगाया, 'एलन मस्क ने फर्जी दावा किया, ट्रंप को ढाका और दिल्ली के बीच गलतफहमी हुई, अमित मालवीय ने झूठ आगे फैलाया, फिर भाजपा के चरणचुंबकों ने उसे लपक लिया।'

उन्होंने कहा कि जबसे ट्रंप प्रशासन के सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) ने 16 फरवरी को कहा कि यूएसएड ने ‘भारत में मतदान’ के लिए 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर का अनुदान रद्द कर दिया है, तबसे भाजपा कांग्रेस पर मनगढ़ंत आरोप लगा रही है। लेकिन अब पता चल रहा है कि यह पूरी खबर तो फर्जी है। जब पैसा भारत आया ही नहीं, तो (अनुदान) रद्द कैसे होगा?'

यूएसएड अनुदान को लेकर क्या बोले कांग्रेस नेता?

कांग्रेस नेता ने कहा कि असल में सारा विवाद ‘डीओजीई’ की सूची में दो यूएसएड अनुदान को लेकर है, जिन्हें वाशिंगटन स्थित चुनाव एवं राजनीतिक प्रक्रिया सुदृढ़ीकरण समूह (सीईपीपीएस) के माध्यम से दिया गया था। रमेश ने कहा कि सीईपीपीएस को यूएसएड से कुल 48.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर मिलने थे। उन्होंने कहा कि अमेरिकी विभाग के अनुसार, इस कोष में मोल्दोवा के लिए 2.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर और 'भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने' के लिए 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर शामिल थे।

कांग्रेस नेता ने दावा किया, 'यूएसएड ने मोल्दोवा के लिए सीईपीपीएस को पहला कोष 2016 में दिया था, जिसका आईडी ‘एड117एलए1600001’ है। लेकिन भारत के लिए डीओजीई द्वारा चिह्नित यूएसएड का 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर का अनुदान बिल्कुल फर्जी है, क्योंकि यह बांग्लादेश के लिए था, भारत के लिए नहीं।' रमेश ने कहा कि असलियत यह है कि बांग्लादेश के लिए आवंटित 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर में से 1.34 करोड़ अमेरिकी डॉलर वहां जनवरी 2024 के चुनाव के पहले ही दिया जा चुका है। उन्होंने कहा, 'हर संघीय अनुदान में यह निहित होता है कि वह किस देश में इस्तेमाल होना है। अमेरिकी संघीय खर्च के अनुसार, 2008 के बाद से भारत में कोई यूएसएड वित्त पोषित सीईपीपीएस परियोजना ही नहीं है।'

'विपक्षी पार्टी पर आरोप लगाना राष्ट्रद्रोह नहीं तो और क्या है?'

कांग्रेस नेता ने कहा, 'सीईपीपीएस को एकमात्र चल रहा 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर का यूएसएड अनुदान, जिसकी आईडी ‘72038822एलए00001’ है, वह जुलाई 2022 में बांग्लादेश की ‘अमार वोट अमार’ के लिए स्वीकृत किया गया था।' उन्होंने कहा, 'नवंबर 2022 में इस अनुदान का उद्देश्य बदलकर ‘यूएसएड का नागोरिक कार्यक्रम’ कर दिया गया। ढाका में यूएसएड के एक अधिकारी ने दिसंबर 2024 में अमेरिका की यात्रा के दौरान सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि भी की और कहा कि मैं यूएसएड द्वारा वित्त पोषित 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर के सीईपीपीएस/नागोरिक कार्यक्रम को प्रबंधित करता हूं।' रमेश ने कहा, 'अब तो भाजपा सिर्फ इस बात का जवाब दे : भाजपा ने भारत के लोकतंत्र को लेकर फर्जी खबर क्यों फैलाई? भाजपा ने अमेरिका से फर्जी खबर फैलाकर देशविरोधी काम क्यों किया? भाजपा का अमेरिका से फर्जी खबरों को लेकर भारत की विपक्षी पार्टी पर आरोप लगाना राष्ट्रद्रोह नहीं तो और क्या है?'

उन्होंने कहा, 'जवाब तो प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी देना होगा कि डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क बार-बार भारत का अपमान कर रहे हैं, लेकिन हमारी सरकार इस पर चुप क्यों है?' कांग्रेस नेता ने कहा, 'कहीं ऐसा तो नहीं अदाणी के लिए रहम की भीख मांगने के चक्कर में देश के आत्मसम्मान से समझौता किया गया है?'

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के किस बयान पर छिड़ा है संग्राम?

ट्रंप ने हाल के दिनों में चौथी बार दावा किया है कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने भारत को मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर की धनराशि आवंटित की। कांग्रेस ने ट्रंप के इस दावे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी से इस मामले पर अपने मित्र (ट्रंप) से बात करने और आरोप का दृढ़ता से खंडन करने का आग्रह किया है।

कांग्रेस ने विकास एजेंसियों, सहायता तंत्रों और बहुपक्षीय मंचों की ओर से भारत को दी जा रही धनराशि पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। पार्टी ने विश्वसनीय नागरिक समाज के सदस्यों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और राजनीतिक दलों के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए आरएसएस-भाजपा और 'उनके पारिस्थितिकी तंत्र' के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी मांग की।

वाशिंगटन में ‘गवर्नर्स वर्किंग सेशन’ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा था, 'भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए मेरे मित्र प्रधानमंत्री मोदी को 2.1 करोड़ डॉलर दिए जा रहे हैं। हम भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए 2.1 करोड़ डॉलर दे रहे हैं। हमारा क्या? मैं भी मतदान प्रतिशत बढ़ाना चाहता हूं।' शुक्रवार को व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम की एक वीडियो क्लिप साझा की। ट्रंप ने यह भी कहा कि बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य को मजबूत करने के लिए एक ऐसी फर्म को पैसा दिया गया, जिसके बारे में किसी ने कभी सुना ही नहीं था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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