UP BJP: भारतीय जनता पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश केवल एक राज्य नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र है। बंगाल, बिहार और असम के बाद अब सबसे बड़ा राजनीतिक संघर्ष उत्तर प्रदेश में ही होना है। यही वजह है कि मिशन 2027 पर फोकस करते हुए बीजेपी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस ली है। एक तरफ पार्टी बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को चुनावी प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षण दे रही है, वहीं दूसरी ओर अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूती से तैयार करने में लगी है। जानकारी के अनुसार, अगले 5 से 7 दिन में बीजेपी यूपी की प्रदेश कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी। इसी को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर जारी है। दो दिन पहले प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की और प्रदेश इकाई के साथ साथ संगठन के अन्य मुद्दों पर लगभग ढाई घंटे तक बातचीत की।
नितिन नवीन के साथ पंकज चौधरी की मीटिंग
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी की अहम बैठक के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चा का बाजार गरमाया हुआ है। इस बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष भी मौजूद रहे थे। बैठक में जमीनी स्तर पर पसीना बहाने वाले और इलेक्शन माइक्रो मैनेजमेंट के माहिर खिलाड़ियों को बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर चर्चा की बात सामने आ रही है। दरअसल, यूपी चुनाव में पार्टी नई टीम और नई ऊर्जा के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है।
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और अन्य सीनियर लीडर्स की एक बैठक 22 मई को एक बार फिर हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह दोबारा केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। बुधवार को हुई बैठक में नई टीम के नामों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को सौंपे जाने की बात सामने आई है। इस बीच दावा किया जा रहा है कि यूपी बीजेपी की नई टीम की लिस्ट अ
ब किसी भी वक्त जारी की जा सकती है। बीजेपी यूपी की नई टीम कैसी होगी इसे लेकर भी जानकारी सामने आई है। नई टीम में इस बार सिर्फ ग्राउंड परफॉर्मेंस को तरजीह के साथ साथ महिलाओं को पर्याप्त भागीदारी देने की योजना बनी है। इसके साथ ही ओबीसी, एससी-एसटी वर्ग के कार्यकर्ताओं को भी नई टीम में शामिल किया जाएगा। टीम में नई ऊर्जा और अनुभव के साथ साथ जातीय संतुलन और समाज के हर वर्ग की परस्पर भागीदारी का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
यूपी मंत्रीमंडल विस्तार और भाजपा का समीकरण
हाल ही में योगी मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ और कुल छह नए मंत्री बनाए गए। पहले से मौजूद दो राज्यमंत्रियों को प्रमोशन देकर स्वतंत्र प्रभार दिया गया। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और विधायक मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया जबकि राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल को स्वतंत्र प्रभार दिया गया। वहीं कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली। कैबिनेट विस्तार में बीजेपी ने जातिगत समीकरण के साथ साथ क्षेत्रीय समीकरण साधने की भी कोशिश की और अब इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की 45 सदस्यीय नई टीम बनाने की कवायद शुरू हो गई है।
बुधवार को नई दिल्ली में दो सत्रों में आयोजित बैठक में यूपी भाजपा इकाई के संभावित सभी नामों पर अलग-अलग चर्चा हुई। उनके क्षेत्रीय एवं जातीय समीकरणों को चुनावी कसौटी पर कसा गया। छह क्षेत्रीय अध्यक्षों में पश्चिम क्षेत्र में राजपूत, गुर्जर और वैश्य समीकरण पर ज्यादा फोकस है। अवध क्षेत्र में ब्राह्मण चेहरे एवं ब्रज में शाक्य या लोध में से किसी को अवसर मिल सकता है। वाराणसी क्षेत्र में नाम पर सहमति से पहले दिल्ली की राय महत्वपूर्ण होगी, वहीं गोरखपुर क्षेत्र में मुख्यमंत्री की सहमति का ध्यान रखने की चर्चा है। कानपुर क्षेत्र से जातीय फैक्टर में बदलाव करने की चर्चा है। प्रदेश टीम के साथ-साथ बीजेपी अपने छह सांगठनिक क्षेत्रों- काशी, गोरखपुर, पश्चिम, अवध, ब्रज और कानपुर-बुंदेलखंड के क्षेत्रीय अध्यक्षों की घोषणा करने वाली है। इसी को लेकर दिल्ली से लेकर लखनऊ तक भाजपा पदाधिकारियों की धड़कनें बढ़ गई हैं और पूरे प्रदेश में नई टीम को लेकर हलचल तेज है।
2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी
बीजेपी के प्रदेश संगठन में होने वाला यह फेरबदल केवल नियमित बदलाव नहीं माना जा रहा है। इसे 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के पहले बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नई कार्यकारिणी सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं होगी, बल्कि आने वाले चुनावों की रणनीति तय करने में भी अहम भूमिका निभाएगी। इस कार्यकारिणी में कई चेहरों का प्रमोशन होगा तो कई पदाधिकारी बाहर भी होंगे। खबर तो यह भी है कि यूपी के कई सीनियर लीडर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का हिस्सा बनने जा रहे हैं। लंबे समय से संगठन में सक्रिय और अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय कार्यकारिणी या केंद्रीय जिम्मेदारियों में भेजे जाने की चर्चा है। अब सबकी नजर दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी पर टिकी है, जिसके बाद जल्द संगठनात्मक बदलाव का ऐलान हो सकता है।
सूत्रों का दावा है कि कार्यकारिणी के अलावा पार्टी पुराने और अनुभवी कार्यकर्ताओं को विभिन्न बोर्ड, निगम और आयोगों में उपाध्यक्ष और सदस्य बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा देने की तैयारी में हैं और इसकी सूची भी लगभग फाइनल है। कुछ समय पहले ही BJP ने यूपी के सभी नगर निगमों और नगर पालिकाओं में नामित पार्षद और सभासद नियुक्त किए हैं और अब विकास प्राधिकरणों में भी नामित सदस्यों की नियुक्ति जल्द कर दी जाएगी। बीजेपी अपने इस दांव से पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी काफी हद कब खत्म करने के मूड में है।
