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IPS Prabhakar Chaudhary: 8 साल में 18 ट्रांसफर...कौन हैं IPS प्रभाकर चौधरी? जिनका बार-बार हो जाता है तबादला

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 31, 2023, 02:16 PM IST

IPS Prabhakar Chaudhary: आईपीएस अधिकारी प्रभाकर चौधरी के लिए यह ट्रांसफर कोई नई बात नहीं है। बीते आठ सालों में IPS Prabhakar Chaudhary का यह 18वां ट्रांसफर है। ऐसे में आइए जानते हैं कौन हैं प्रभाकर चौधरी? उन्होंने अब तक कितने जिलों की कमान संभाली है? बार-बार उनका ट्रांसफर क्यों हो जाता है और बरेली में किस कांड के बाद उनका ट्रांसफर ऑर्डर जारी किया गया...

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आईपीएस प्रभाकर चौधरी

IPS Prabhakar Chaudhary: उत्तर प्रदेश में रविवार रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया। इसके तहत 14 आईपीएस अफसरों के तबादले किए गए, जिसमें 10 जिलों के कप्तानों को बदल दिया गया। उत्तर प्रदेश शासन की ओर से जारी की गई इस सूची में बरेली में एसएसपी रहे प्रभाकर चौधरी का नाम भी शामिल है, जिन्हें अब 32वीं पीएसी लखनऊ भेजा गया है। उन्हें, 32वीं वाहिनी पीएसी का सेनानायक बनाया गया है।

2010 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रभाकर चौधरी के लिए यह ट्रांसफर कोई नई बात नहीं है। बीते आठ सालों में IPS Prabhakar Chaudhary का यह 18वां ट्रांसफर है। खास बात यह है कि उनका यह ट्रांसफर ऑर्डर बरेली में कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए कांवड़ियों पर लाठी चार्ज के महज 4 घंटे बाद जारी किया गया था। ऐसे में आइए जानते हैं कौन हैं प्रभाकर चौधरी? उन्होंने अब तक कितने जिलों की कमान संभाली है? बार-बार उनका ट्रांसफर क्यों हो जाता है और बरेली में किस कांड के बाद उनका ट्रांसफर ऑर्डर जारी किया गया...

बरेली कांड के 4 घंटे बाद तबादला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को बरेली में गैर-पारंपरिक रास्ते से कांवड़ यात्रा निकालने के लिए विवाद शुरू हुआ था। उपद्रव बढ़ा और हालात बेकाबू होने लगे, इसके बाद एसएसपी प्रभाकर चौधीर ने लाठी चार्ज के आदेश जारी कर दिए। और महज आधे घंटे बाद शहर की कानून व्यवस्था बहाल भी हो गई। हालांकि, इस घटना के 4 घंटे बाद उनका तबादला 32वीं वाहिनी पीएसी के सेनानायक के तौर पर कर दिया गया।

कौन हैं प्रभाकर चौधरी?

प्रभाकर चौधरी मूल रूप से अंबेडकरनगर के रहने वाले हैं। वह 2010 बैच के आईपीएस अफसर हैं और एक तेजतर्रार अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। जानकारी के मुताबिक, बेसिक ट्रेनिंग के बाद प्रभाकर चौधरी की पहली पोस्टिंग अंडरट्रेनिंग एएसपी नोएडा के तौर पर हुई थी। इसके बाद वह आगरा, जौनपुर, वाराणसी और कानपुर नगर के एसपी सिटी रहे।

2015 में मिली थी ललितपुर की कमान

प्रभाकर चौधरी को बतौर कप्तान पहली पोस्टिंग ललिपुर में मिली थी। उन्हें 2015 में जिले का एसपी बनाकर भेजा गया था। प्रभाकर चौधरी यहां दिसंबर 2015 तक रहे। 11 महीने बाद उनका तबादला कर दिया गया। इसके बादउन्हें इंटेलिजेंस मुख्यालय में पोस्टिंग दी गई। हालांकि, 13 जनवरी 2016 को उन्हें देवरिया का कप्तान बनाकर भेजा गया, लेकिन 8 महीने बाद उनका ट्रांसफर हो गया।

लगातार होता रहा ट्रांसफर

देवरिया के बाद प्रभाकर चौधरी ने बलिया, कानपुर देहात, बिजनौर, मथुरा, सीतापुर, बुलंदशहर, सोनभद्र, वाराणसी, मुरादाबाद, मेरठ की कमान संभाली। सबसे खास बात रही कि प्रभाकर चौधरी सबसे लंबे समय तक यानी 1 साल तक ही मेरठ में टिक पाए। बाकी जिलों में उनका कार्यकाल कुछ महीने का ही रहा। यानी 2015 से बतौर कप्तान बनने के बाद से उनके अब तक कुल 18 बार ट्रांसफर हुए हैं।

12 मार्च को बने थे बरेली एसएसपी

मेरठ के बाद प्रभाकर चौधरी का तबादला आगरा किया गया। हालांकि, महज 5 महीने बाद ही उन्हें सीतापुर पीएसी भेज दिया गया। 12 मार्च को प्रभाकर चौधरी का एक बार फिरे तबादला किया गया और उन्हें बरेली का नया एसएसपी बनाया गया। हालांकि, महज 4 महीने में ही उनका एक बार फिर से ट्रांसफर कर दिया गया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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