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महाराष्ट्र में होने वाला है खेला? उद्धव की शिवसेना ने सीएम फडणवीस की तारीफ की; समझिए सियासत

Maharashtra Politics: क्या महाराष्ट्र में कोई बड़ा खेला होने वाला है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि उद्धव ठाकरे की पार्टी का रुख भाजपा के प्रति थोड़ा नरम होता दिख रहा है। शिवसेना (यूटीबी) ने गढ़चिरौली में विकास योजनाओं को लेकर सीएम फडणवीस की प्रशंसा की है। आपको सारा माजरा समझाते हैं।

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देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे। (पुरानी तस्वीर)

Shiv Sena UTB Praises CM Fadnavis: शिवसेना (यूटीबी) ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले को ‘स्टील सिटी’ में बदलने के उनके प्रयासों के लिए प्रशंसा की। शिवसेना (यूटीबी) ने फडणवीस की सराहना कर 2019 में अविभाजित शिवसेना के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से अलग होने के बाद से एक दुर्लभ उदाहरण पेश किया है।

उद्धव की शिवसेना ने की सीएम फडणवीस की तारीफ

अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में पार्टी ने फडणवीस को ‘देवा भाऊ’ बताया और कहा कि उन्होंने नए साल की पूर्व संध्या पर महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले का दौरा किया और विकास का एक नया अध्याय शुरू किया। महाराष्ट्र की पूर्वी सीमा पर स्थित गढ़चिरौली को अक्सर राज्य का अंतिम जिला कहा जाता है। दो दिन पहले गढ़चिरौली की अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या में वृद्धि होने के मद्देनजर महाराष्ट्र जल्द ही नक्सल समस्या से मुक्त हो जाएगा।

उन्होंने जिले में 32 किलोमीटर लंबी गट्टा-गर्देवाडा-वांगेतुरी सड़क के साथ ही वांगेतुरी-गरदेवाडा-गट्टा-अहेरी मार्ग पर महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) की बस सेवा का उद्घाटन किया था। उन्होंने ‘लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड’ के इस्पात संयंत्र का भी उद्घाटन किया।

हाल ही में हुई थी फडणवीस और उद्धव की मुलाकात

शिवसेना (यूटीबी) ने अपने संपादकीय में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि फडणवीस जिले में कुछ नया करेंगे और वहां के आदिवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएंगे। लगभग दो सप्ताह पहले शिवसेना (यूटीबी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने नागपुर में मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। वर्ष 2019 में अविभाजित शिवसेना और भाजपा के बीच गठबंधन टूटने के बाद दोनों नेताओं के बीच संबंध खराब हो गए थे। संपादकीय में कहा गया है, ‘‘यदि मुख्यमंत्री ने जो कहा है वह सच है तो यह महाराष्ट्र के लिए सकारात्मक घटनाक्रम है।’’

पार्टी ने कहा कि ‘‘देवा भाऊ’’ (फडणवीस) को यह दिखाने की जरूरत है कि गढ़चिरौली के विकास के लिए उठाए गए कदम आम लोगों और गरीब आदिवासियों की भलाई के लिए हैं, न कि किसी खनन कारोबारी के लिए। इसमें कहा गया है, ‘‘बीड में बंदूकों का राज है। फिर भी, अगर गढ़चिरौली में संविधान का राज है, तो मुख्यमंत्री फडणवीस प्रशंसा के पात्र हैं।’’ पार्टी द्वारा उनकी प्रशंसा किये जाने के बारे में पूछे जाने पर फडणवीस ने कहा, ‘‘यह अच्छी बात है। धन्यवाद।’’

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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