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ट्रेन का टीटी बना गुंडा! बरौनी-लखनऊ एक्सप्रेस में यात्री को जमकर पीटा, VIDEO देख खौल उठेगा खून

TT Becomes Goon: यात्री ये सवाल करता रह गया कि मेरी कोई गलती है क्या? बरौनी-लखनऊ एक्सप्रेस का टीटी अपनी गर्मी दिखाता रहा। चलती ट्रेन में उसने यात्री को कई थप्पड़ जड़ दिए। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में इस टीटी की गुंडागर्दी सामने आई तो सवाल उठने लगे।

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टीटी ने यात्री को बेरहमी से पीटा।

Photo : Twitter

जोर का तमाचा... टीटी के वेश में ये गुंडा यात्री से खड़े होने के लिए बोल रहा है- 'खड़ा हो, खड़ा हो, खड़ा हो...' यात्री ने पूछा, 'कोई गलती है मेरी?' इतने में टीटी ने फिर से एक थप्पड़ जड़ दिया। ट्रेन में बैठे दूसरे यात्री ने पूछा- 'मार क्यों रहे हैं?' पिट रहे यात्री ने फिर पूछा, 'मेरी कोई गलती है सर?' इतने में टीटी ने यात्री के गले में लपेटा गमछा पकड़ लिया और उसे खींचने लगा। इतने में एक महिला की आवाज सुनाई दी, 'सर जाने दीजिए हो गया न, ऐसा मत कीजिए।' मगर टीटी को न जाने किस बात का अहंकार था कि वो यात्री को पीटता रहा।

चलती ट्रेन में टीटी की गुंडागर्दी

ये वाकया उत्तर प्रदेश के बरौनी से लखनऊ आ रही ट्रेन बरौनी-लखनऊ जंक्शन एक्सप्रेस (15203) का है। चलती ट्रेन में प्रकाश नाम के टीटीई ने एक यात्री को बेरहमी से पीटता रहा, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बताया जा रहा है कि गोरखपुर से लखनऊ के बीच टीटी यात्रियों की चेकिंग कर रहा था। टीटी का वीडियो जब वायरल हुआ तो प्रशासन ने गुंडागर्दी करने वाले इस टीटी को निलंबित कर दिया। ये बताया गया है कि सोशल मीडिया पर बरौनी-लखनऊ एक्सप्रेस में टीटीई द्वारा एक यात्री को थप्पड़ मारने के मामले में टीटीई को सक्षम प्राधिकारी द्वारा निलंबित कर दिया गया है और संबंधित भारतीय रेलवे के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। अब इस मामले ने सियासी मोड़ ले लिया है।

स्वाति मालीवाल ने उठाया सवाल

राज्यसभा सांसद और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एक्स पर किए पोस्ट में लिखा कि 'हम कितना ही वंदे भारत का जश्न मना लें, भारत की रेलवे तब सुधरेगी जब देश का गरीब आदमी आरामदायक और इज्जत से यात्रा कर पाएगा। ये वीडियो देख खून खौलता है। माननीय मंत्री अश्विनी वैष्णव जी कृपया मामले का संज्ञान लें और इस TC पर सख्त कार्यवाही करें। ट्रेन नंबर - 15203'

घटना को लेकर लोगों में भारी आक्रोश

भारतीय रेलवे की इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। टीटी सरेआम बेखौफ होकर एक यात्री को इतनी बेरहमी से पीट रहा है, थप्पड़ पर थप्पड़ जड़ रहा है। इतना ही नहीं जब ट्रेन में बैठे दूसरे यात्री ने जब वीडियो बनाया तो उसके हाथ से फोन छुड़ाने की भी कोशिश की। टीटी ने उसके साथ भी हाथापाई की, ऐसी गुंडागर्दी देख किसी का भी खून खौल सकता है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से इस मामले में सुध लेने और कठोर कार्रवाई करने की मांग उठ रही है। लोगों ने पूछा है कि क्या इन लोगों को ऐसे पीटने की आजादी है, क्या टीटी के नाम पर गुंडे रखे गए हैं? कुछ लोगों ने तो ये भी कहा है कि कार्रवाई कीजिए और हां, जनता को कीड़े-मकोड़े समझना बंद कीजिए।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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