NEET समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों के मुद्दे पर शिक्षा विभाग से जुड़ी संसदीय समिति की बैठक में सदस्यों ने शिक्षा मंत्रालय और एनटीए के अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे। सूत्रों के मुताबिक समिति के सदस्यों ने बैठक के दौरान नाराजगी जताते हुए कहा कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हो रही है कि एक परीक्षा कराने के लिए सेना की मदद लेने की जरूरत पड़ रही है।
सूत्रों के मुताबिक समिति के सदस्यों ने बैठक के दौरान नाराजगी जताते हुए कहा कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हो रही है कि एक परीक्षा कराने के लिए सेना की मदद लेने की जरूरत पड़ रही है।
सदस्यों ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों एक परीक्षा को सही तरीके से आयोजित कराने के लिए प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ता है। साथ ही यह भी पूछा गया कि ऐसे ठोस इंतजाम क्यों नहीं किए जाते जिससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लग सके। समिति के सदस्यों ने कहा कि आखिर बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाएं क्यों सामने आती हैं।
'छात्रों की दिक्कतों पर ध्यान दिया जाएगा और उन्हें इंसाफ मिलेगा'
सूत्रों के मुताबिक बैठक के अंत में समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने एनटीए समेत अन्य अधिकारियों से कहा कि उन्हें सिस्टम और अधिकारियों के साथ-साथ प्रधानमंत्री पर भी पूरा भरोसा है कि वे छात्रों की परेशानियों के प्रति संवेदनशील रुख अपनाएंगे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि छात्रों की दिक्कतों पर ध्यान दिया जाएगा और उन्हें इंसाफ मिलेगा।
वहीं दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (NEET-UG) प्रश्न पत्र लीक मामले में तीन आरोपियों को सोमवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।इन आरोपियों में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा अनुवादक के तौर पर सूचीबद्ध किये गए भौतिकी के एक व्याख्याता, लातूर के एक बाल रोग विशेषज्ञ और एक भौतिकी शिक्षक शामिल हैं। विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने भौतिकी अनुवादक मनीषा संजय हवलदार, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज शिरुरे और भौतिकी शिक्षक तेजस हर्षदकुमार शाह की न्यायिक हिरासत के अनुरोध संबंधी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CNI) की याचिका स्वीकार कर ली।
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