NEET Paper leak Reason : 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक और अनुवाद संबंधी गंभीर गड़बड़ियों के सामने आने के बाद करीब 22 लाख अभ्यर्थियों के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया था। इसके बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई। अब छात्र, अभिभावक और शिक्षा जगत से जुड़े लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। ऐसे में अब पेपर में हुई गड़बड़ियों को लेकर टाइम्स नाऊ नवभारत के रविकांत राय के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा में गड़बड़ी की वजह का खुलासा किया।
कौन था पूरे मामले का जिम्मेदार ?
पेपर लीक को लेकर सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री ने कहा कि 3 मई को हुई परीक्षा में गड़बड़ी निकली। जिन शिक्षकों ने सवाल बनवाया, जिन भाषा ट्रांसलेटर्स (शिक्षकों) को दायित्व दिया गया, उस स्तर पर चूक हुई है। सीबीआई इन्क्लाइरी करके तह तक पहुंच रहे हैं। इसे सुधारने के लिए तत्कालिक निर्णय लिया गया। परीक्षा माफियाओं के दबाव के कारण एक भी सही विद्यार्थी के हक को कंप्रोमाइज नहीं करेंगे। इसीलिये हमने फैसला लेते हुए तुरंत परीक्षा को रद्द किया गया और फिर 21 जून को परीक्षा करवाने का फैसला लिया गया।
क्यों रद्द की गई परीक्षा ?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि सीबीआई पूरे मामले की तह तक पहुंच रही है। उस चूक को सुधारने के लिए हमने तत्कालिक निर्णय लिया और एक भी विद्यार्थी के बौद्धिक हक को कम्प्रमाइज नहीं होने दिया। इसीलिये परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। दोबारा 21 जून को परीक्षा की तिथि निर्धारित की गई। हमने उस परीक्षा को पूरा करने के लिए परीक्षा पत्र बनाने से लेकर और परीक्षा से लौटकर एनटी केंद्र तक उनकी आंसर शीट आने तक की प्रक्रिया को फुलप्रूफ किया जाएगा। इस बार सरकार तत्पर है और पूरी जिम्मेदारी ले रही है।
21 जून को हो रहा री एग्जाम
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा 'परीक्षा माफियाओं की वजह से परीक्षा को रद्द किया गया, ताकि छात्रों को भरोसा रहे कि योग्य उम्मीदवार ही आगे जाएगा। परीक्षा का आयोजन दोबारा से 21 जून को कराया जा रहा है। इस बार तैयारियां पहले से ज्यादा दुरुस्त है। पेपर को लीक प्रूफ रखा जाएगा। मैं पूरा जिम्मेवारी के साथ कह रहा हूं सरकार इस बार तत्पर है।
क्या है पूरा मामला ?
NEET-UG 2026 परीक्षा विवाद तब शुरू हुआ जब 3 मई को आयोजित हुई परीक्षा में पेपर लीक और प्रश्नपत्रों के अनुवाद में गंभीर त्रुटियों के आरोप सामने आए। कई राज्यों से अभ्यर्थियों ने शिकायत की कि क्षेत्रीय भाषाओं में ट्रांसलेटेड कुछ सवालों में तथ्यात्मक और भाषाई गलतियां थीं, जिससे छात्रों को सवाल समझने में परेशानी हुई। इसके अलावा परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए। मामले ने तूल पकड़ा तो लाखों छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा रद्द करने और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। बढ़ते विवाद के बीच परीक्षा को रद्द कर दिया गया और जांच की जिम्मेदारी CBI को सौंप दी गई। जांच एजेंसियां पेपर लीक नेटवर्क, परीक्षा माफिया और गड़बड़ियों में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। वहीं, NTA ने छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया और भरोसा दिलाया कि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
