देश के दो सूबों में दलितों के साथ कथित तौर पर बुरी तरह टॉर्चर किया गया। उत्तर प्रदेश के औरेया में जहां एक टीचर की पिटाई के चलते निचली जाति के लड़के की जान चली गई और उसके विरोध में वहां बवाल हुआ। वहीं, मध्य प्रदेश के छतरपुर में कुर्सी पर बैठने को लेकर एक शख्स को बेरहमी से कूटा गया।
औरेया वाले मामले में मृतक की उम्र 15 साल थी और उसने सोमवार (26 सितंबर, 2022) को दम तोड़ा, जिसके बाद शाम को शहर में हिंसक प्रदर्शन हुए। पुलिस के दो वाहनों को फूंक दिया गया, जबकि कम से कम दो गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस के मुताबिक, लड़के की लाश पोस्टमार्टम के बाद घरवालों के हवाले कर दी गई थी, जबकि प्रदर्शनकारियों ने उसे स्कूल के बाहर रखकर नारेबाजी की। उन्होंने इसके अलावा पुलिस टीम पर पथराव भी किया, जिसके बाद मौके पर हालात काबू करने के लिए पुलिस बल भेजा गया।
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, घटना से पहले लड़का किडनी की समस्या से जूझ रहा था और लखनऊ के अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। हालांकि, जांच टीम को इस बारे में अस्पताल और पीड़ित परिवार से कई चीजें क्रॉसचेक करनी हैं। बताया गया कि टेस्ट में गलत जवाब लिखने पर सात सितंबर को उसकी पिटाई गई थी। पिता की शिकायत पर 24 सितंबर को केस दर्ज हुआ।
पिता का दावा है कि टीचर ने बच्चे के पूरे इलाज के लिए पैसे देने का वादा किया था, पर उसने सिर्फ 40 हजार रुपए ही दिए। आरोप है कि जब पीड़ित परिवार की ओर से अधिक रुपए मांगे गए तब आरोपी ने उन्हें गालियां दीं और जातिगत टिप्पणियां कीं। आरोपी शिक्षक फिलहाल फरार है, पर उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 308, 323, 504 के साथ एससी एंड एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
उधर, मध्य प्रदेश के छतरपुर में एक दलित शख्स (30) के परिवार ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत कार्यालय में कुर्सी पर बैठने पर कुछ लोगों ने उसे बुरी तरह मारा-पीटा। पर बिजावर के अनुविभागीय पुलिस अधिकारी रघु केसरी ने सोमवार को इस आरोप का खंडन किया। वह बोले कि कुर्सी पर बैठने के लिए आदमी को नहीं पीटा गया बल्कि शनिवार को हुई यह घटना उस आदमी और आरोपी के बीच दुश्मनी के चलते हुई। पुलिस मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश की कर रही है।
