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सफर को आसान बनाने में कितनी अहम है टनल? देखें भारत की 10 सबसे बड़ी सड़क सुरंगों की लिस्ट

Top 10 Tunnels in India: सड़क सुरंगें आधुनिक बुनियादी ढांचे का एक अभिन्न अंग हैं, वे न केवल दो रास्तों को जोड़ती हैं और दूरी को कम करती हैं और समय बचाती हैं, बल्कि वे हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करके यात्रियों के लिए अपने गंतव्य तक पहुंचना भी आसान बनाती हैं। जानिए भारत की 10 सबसे बड़ी सुरंगों के बारे में।

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कहां है भारत की बड़ी सड़क सुरंग?

Photo : PTI

Tunnel News: क्या आप जानते हैं कि भारत की बड़ी सड़क सुरंग कहां है? उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिलक्यारा निर्माणाधीन टनल में भूस्खलन के चलते आंशिक रूप से ढह गया, जिसमें 40 मजदूर अंदर फंस गए। सड़क सुरंगें आधुनिक बुनियादी ढांचे का एक अभिन्न अंग हैं, वे न केवल दो रास्तों को जोड़ती हैं और दूरी को कम करती हैं और समय बचाती हैं, बल्कि वे हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करके यात्रियों के लिए अपने गंतव्य तक पहुंचना भी आसान बनाती हैं। आपको भारत के 10 सबसे बड़ी सुरंगों के बारे में बताते हैं।

1). डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रोड सुरंग (जम्मू और कश्मीर)

भारत की सबसे लंबी सुरंग मानी जाने वाली श्यामा प्रसाद मुखर्जी रोड सुरंग 9.34 किमी लंबी है। यह चेनानी से शुरू होती है और नशरी पर समाप्त होती है। ये सुरंग जम्मू कश्मीर के उधमपुर में चेनानी कस्बे को रामबन जिले के नशरी कस्बे से जोड़ती है। समुद्र तल से लगभग 4000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह सुरंग जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा के समय को दो घंटे कम कर देती है। ये सुरंग जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शिवालिक की पहाड़ियों पर बनी है। इसे चेनानी नशरी सुरंग भी कहते हैं।

2). अटल रोड सुरंग या रोहतांग सुरंग (हिमालय पर्वत)

रोहतांग सुरंग या अटल सुरंग वर्तमान में भारत की सबसे लंबी ऊंचाई वाली सुरंग है, जो हिमालय पर्वत में स्थित है। अक्टूबर 2020 में उद्घाटन किया गया, यह 9.02 किमी लंबी सुरंग लेह और मनाली को जोड़ती है और इसे सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा बनाया गया था। यह हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रा के नीचे और 3,878 मीटर की ऊंचाई पर बनाई गई है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर, अटल सड़क सुरंग लेह और मनाली के बीच यात्रा के समय को 4 घंटे कम कर देती है।

3). कुथिरन रोड सुरंग (त्रिशूर, केरल)

कुथिरन रोड सुरंग वर्तमान में भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंगों की सूची में शुमार है और यह केरल के त्रिशूर में स्थित है। इसकी लंबाई 8.7 किमी है और यह त्रिशूर और पलक्कड़ के बीच यात्रा के समय को दो घंटे कम कर देती है। अप्रैल 2019 में उद्घाटन किया गया, कुथिरन रोड सुरंग का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा किया गया था। हालांकि, अटल रोड सुरंग के विपरीत, कुथिरन सड़क सुरंग में चार लेन हैं।

4). बनिहाल काजीगुंड रोड सुरंग (जम्मू-कश्मीर)

बनिहाल काजीगुंड रोड सुरंग का उद्घाटन वर्ष 2021 में किया गया था, और इस इंजीनियरिंग चमत्कार को बनाने में 10 साल लग गए। समुद्र तल से 1800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सुरंग की कुल लंबाई 8.5 किमी है। दो ट्यूब वाली सुरंग 124 जेट पंखे, 234 सीसीटीवी आधुनिक कैमरे, एक अग्निशमन प्रणाली और एक निकास प्रणाली से लैस है।

5). जोजी ला सुरंग (जम्मू और कश्मीर)

जोजी ला सुरंग अभी निर्माणाधीन है। इसके बनने के बाद जोजी-ला दर्रे को पार करने में अभी लगने वाले 3.5 घंटों की तुलना में 15 मिनट में पार करना संभव हो जाएगा। जोजी ला सुरंग भी कारगिल और श्रीनगर के बीच उचित संपर्क स्थापित करेगी। इसके साथ ही, रक्षा कर्मियों को भोजन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और क्षेत्र में व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देना सुरंग के प्रमुख उद्देश्य है। जानकारी के अनुसार इसके निर्माण के बाद ये भारत की सबसे लंबी सुरंग हो जाएगी।

6). सेला सुरंग (अरुणाचल प्रदेश)

एक अन्य निर्माणाधीन सुरंग, अरुणाचल प्रदेश में सेला सुरंग 12.04 किमी लंबी होगी, और सेला दर्रे से होकर गुजरेगी। इसके पूरा होने के बाद, सेला सुरंग दिरांग और तवांग को जोड़ेगी। ये सुरंग असम में गुवाहाटी और अरुणाचल प्रदेश में तवांग के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी।

7). ऑट सुरंग (हिमाचल प्रदेश)

ऑट सुरंग एक समय एशिया की सबसे लंबी सुरंग थी, जब साल 2006 में इसका अनावरण किया गया था। यह कुल्लू और मनाली के प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करती है। यह डबल लेन सुरंग हिमाचल प्रदेश में लारजी बांध जलाशय के पास स्थित है। इसे अभी भी वेंटिलेशन सुविधाओं, अग्निशामक यंत्रों और सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाना बाकी है, लेकिन इस सुरंग के माध्यम से ड्राइविंग का रोमांच काफी बढ़ जाता है।

8). घाट की गुणी सुरंग (राजस्थान)

राजस्थान में घाट की गुणी सुरंग राजधानी जयपुर को आगरा से जोड़ती है। यह 2013 से चालू है, और सुरंग से सटा हुआ बाहरी दृश्य सुरम्य झालाना पहाड़ियों और कुछ भव्य विरासत इमारतों से घिरा हुआ है।

9). जेड-मोड़ सुरंग (जम्मू-कश्मीर)

जम्मू और कश्मीर में एक और निर्माणाधीन सुरंग, ज़ेड-मोड़ सुरंग कई उद्देश्यों को पूरा करेगी। एक बार पूरा होने पर, यह सुरंग 6.5 किमी लंबी होगी और लद्दाख क्षेत्र में श्रीनगर और कारगिल शहरों को जोड़ेगी। मजेदार तथ्य ये है कि सुरंग का नाम गगनगीर और सोनमर्ग के बीच Z संरचना के कारण पड़ा।

10). भाटन सुरंग (महाराष्ट्र)

भाटन सुरंग की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह छह लेन वाली सुरंग है। यह वर्ष 2000 से चालू है और इसे भारत में सबसे उन्नत और सुंदर सुरंगों में से एक माना जाता है। यह भव्य सुरंग मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के साथ 1.17 किमी तक फैला है। इसके अलावा, राजसी सह्याद्रि पर्वतमाला का दृश्य इस जगह की सुंदरता को और बढ़ा देता है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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