चुनाव आयोग में बदलाव की बयार बहती हुई नजर रही है। ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी संभाले हुए 100 दिन पूरे हो चुके हैं। पिछले कुछ सालों में भारतीय राजनीति में जिस तरह से ईवीएम, वोटर लिस्ट और पारदर्शिता के मुद्दे पर केंद्रीय चुनाव आयोग आलोचना का शिकार रहा है, ये सब देखते हुए बड़े कदमों को उठाए जाने की जरूरत थी।
इस साल के आखिरी में बिहार में विधानसभा चुनाव होंगे। इसमें चुनाव आयोग के कई सुधार नजर आएंगे। CEC ज्ञानेश कुमार ने अब तक जो कदम उठाएं हैं उसे हमने 6 हिस्सों में बांटा है। आइए विस्तार से चुनाव आयोग के इन ठोस कदमों के बारे में पढ़ते हैं।
मतदाताओं की सुविधा से जुड़े 5 कदम
भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा चुनावी लोकतंत्र भी है। नहीं मतदाता सूची के मुताबिक देश में तकरीबन 100 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर हैं। संख्या के लिहाज से देखें तो यह कई बड़े देशों की कुल आबादी से भी ज्यादा है। बेहतर मतदान प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग ने अब तक इन पांच कदमों के जरिए वोटर के लिए फैसला लिया है
1. आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती वोटर के लिए उनका मोबाइल फोन बन चुका है। क्योंकि मतदान केंद्र के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की इजाजत नहीं होती है और कई बार इसे रखने के लिए काफी मशक्कत भी करनी पड़ती है। इसको ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने अबसे हर चुनाव में हर पोलिंग स्टेशन पर फोन रखने की निःशुल्क सुविधा शुरू करने का फैसला लिया है।
2. लंबी कतारों को नियंत्रित करने के लिए किसी भी पोलिंग स्टेशन पर अधिकतम मतदाताओं की सूची 1200 से ज्यादा नहीं होगी।
3. हाई राइज सोसाइटी और बड़ी रिहायशी कॉलोनी के लिए अलग से पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे।
4. इलेक्टरल रोल को अपडेट करने के लिए मृतकों का आंकड़ा सीधे रजिस्टार जनरल ऑफ इंडिया के डेटाबेस से लेकर उसे वेरीफाई करने के बाद अपडेट करा जा रहा है।
5. वोटर इनफॉरमेशन स्लिप यानी कि मतदाता पर्ची को और ज्यादा आसान बनाया गया है। वोटर का सीरियल नंबर और पार्ट नंबर अधिक प्रमुखता के साथ बड़े और स्पष्ट अक्षरों में वोटर स्लिप पर नजर आएगा।
राजनीतिक दलों से जुड़े हुए 4 बड़े कदम
किसी भी चुनावी लोकतंत्र में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उन राजनीतिक दलों का होता है जो चुनावी मैदान में उतरकर सरकार बनाने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं। पिछले कुछ सालों में खास करके विपक्षी पार्टियों ने तमाम सारे मुद्दे चुनाव आयोग को लेकर उठाए और कई बार अपनी शिकायतें और नाराजगी भी हर मंच पर रखी। इसे देखते हुए नए मुख्य चुनाव आयुक्त ने महसूस किया कि देश के सभी राजनीतिक दलों से ज्यादा से ज्यादा संवाद बनाने की जरूरत है। राजनीतिक दलों से जुड़े चार बड़े कदमों के बारे में जानते हैं
1. पोलिंग स्टेशन के एंट्री पॉइंट से राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के मौजूद रहने की दूरी को घटाकर 100 मीटर तक किया गया।
2. देशभर में सभी राजनीतिक दलों के साथ अलग-अलग स्तरों पर बैठक हुई, जिसमें तकरीबन 28000 राजनीतिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
3. अब तक केंद्रीय चुनाव आयोग राष्ट्रीय दलों और राज्य स्तर के राजनीतिक दलों जैसे आम आदमी पार्टी, बीजेपी , बीएसपी, सीपीएम और नेशनल पीपुल्स पार्टी के प्रमुखों के साथ बैठक कर चुका है। सूत्रों के मुताबिक आगामी उपचुनाव के बाद चुनाव आयोग की बैठक मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के साथ भी होनी है।
4. राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट की दक्षता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी किया जा रहे हैं।
चुनावी प्रक्रिया संबंधी सुधार
1. चुनावी प्रक्रिया में आम जन आसानी से हिस्सा ले पाए। इसके लिए चुनाव आयोग अब तक का सबसे एडवांस्ड इंटीग्रेटेड डैशबोर्ड लाने जा रहा है। जिसका नाम होगा ECINET। ये डैशबोर्ड चुनाव आयोग के सभी 40 मोबाइल एप्लीकेशन और वेबसाइट की जगह ले लेगा। इसका मकसद चुनाव की प्रक्रिया से जुड़े सभी हिस्सेदारों को एक ही जगह पर सारी सूचनाएं देना है। अभी अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग एप और वेबसाइट का इस्तेमाल होता है।
2. एक ही EPIC नंबर पर एक से ज्यादा वोटर आईडी कार्ड बने होने की समस्या को जड़ से खत्म कर दिया गया है। अब भारत में यूनिक EPIC नंबर की व्यवस्था लागू कर दी गई है। यानी कि अब हर मतदाता के वोटर आईडी कार्ड का अपना एक यूनिक नंबर होगा।
मतदान कर्मियों से जुड़े हुए चुनावी सुधार
वोटर लिस्ट बनाने से लेकर नतीजे आने तक चुनाव नतीजे आने तक देश भर में तकरीबन 2 करोड़ चुनाव कर्मी अपनी भूमिका निभाते हैं। मतदान कर्मियों के कामकाज को और ज्यादा सुविधाजनक और सशक्त बनाने के लिए भी नए चुनाव आयुक्त ने कुछ अहम फैसले लिए हैं।
1. बूथ लेवल ऑफिसर्स को जो नया फोटो आईडी कार्ड दिया गया है उसमें उनसे जुड़ी जानकारियां और उनकी फोटो स्पष्ट नजर आ रहे हैं।
2. बूथ लेवल ऑफिसर की क्षमता बढ़ाने के लिए अब तक 3000 से ज्यादा BLO की ट्रेनिंग चुनाव आयोग करा चुका है। वहीं अगले कुछ सालों में एक लाख से ज्यादा बूथ लेवल ऑफिसर सुपरवाइजर को ट्रेनिंग दी जाएगी।
3. बिहार चुनाव को मद्देनजर रखते हुए वहां के पुलिस अधिकारियों को भी चुनावी प्रक्रिया से संबंधित ट्रेनिंग दिल्ली में दी जा चुकी है।
चुनाव के कानून से जुड़े हुए अहम कदम
चुनावी प्रक्रिया से जुड़े हुए अब तक 41 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो चुकी है और इन सभी मुकदमों में केंद्रीय चुनाव आयोग की कार्यशैली को क्लीन चिट मिली है। केंद्रीय चुनाव आयोग लगातार अपनी लीगल टीम और मुख्य चुनाव अधिकारियों के साथ लीगल फ्रेमवर्क को मजबूत करने में जुटा हुआ है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची बनाने से लेकर, चुनाव करवाने में कुल 28 हिस्सेदारों की भूमिका को चिन्हित किया है। जिसमें मतदाता, मतदान कर्मी, राजनीतिक दल, प्रत्याशी, मीडियाकर्मी और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। इन सभी हिस्सेदारों को भी चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी हुई ट्रेनिंग देने की तैयारी हो रही है।
इसके अलावा अगर देखे तो केंद्रीय चुनाव आयोग ने अपने प्रशासनिक तौर तरीकों में भी अपग्रेडेशन किया है। चुनाव आयोग ने अपने सभी दफ्तरों में कर्मचारियों के लिए बायोमैट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य कर दिया है। डिजिटल माध्यमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा केंद्रीय चुनाव आयोग लगातार सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों से भी बैठकर कर रहा है।
ऐसे में कुल मिलाकर देखें तो पिछले तीन महीना में मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका में ज्ञानेश कुमार ने तकरीबन 21 बड़े कदम उठाए हैं। आने वाले समय में सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट की दिल्ली तक चुनाव आयोग को कई अग्नि परीक्षाएं पार करनी हैं। इन बुनियादी बदलाव के बाद ही चुनाव आयोग देश में वोटर आई कार्ड को आधार से जोड़ने, एक देश एक चुनाव और भविष्य में डिजिटल तरीके से चुनाव कराने की क्रांतिकारी फैसलों की ओर कदम बढ़ा सकता है।
