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क्या नेटफ्लिक्स सीरीज आईसी 814: द कंधार हाईजैक पर लगेगा प्रतिबंध? दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा मामला

नेटफ्लिक्स सीरीज आईसी 814: द कंधार हाईजैक पर प्रतिबंध लगाने की मांग का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। सवाल ये है कि क्या इस वेब सीरीज पर अदालत द्वारा बैन लगाया जाएगा। सूचना प्रसारण मंत्रालय ने इस विवाद के बाद नेटफ्लिक्स के कंटेंट प्रमुख को तलब किया है।

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नेटफ्लिक्स सीरीज आईसी 814: द कंधार हाईजैक पर प्रतिबंध लगाने की मांग का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा।

KEY HIGHLIGHTS
  • वेब सीरीज आईसी 814: द कंधार हाईजैक पर प्रतिबंध लगाने की मांग
  • नेटफ्लिक्स सीरीज पर बैन लगाने की मांग का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा
  • सूचना प्रसारण मंत्रालय ने नेटफ्लिक्स के कंटेंट प्रमुख को तलब किया है

IC 814: The Kandahar Hijack Controversy: अपहरणकर्ताओं के नाम को लेकर 'आईसी 814: द कंधार हाईजैक' वेब सीरीज पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। जहां एक ओर इस वेब सीरीज विवाद में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने नेटफ्लिक्स इंडिया की कंटेट प्रमुख को दिल्ली तलब किया है तो वहीं, अब ये मामले अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर बॉलीवुड को बायकॉट की मांग ने फिर से जोर पकड़ लिया है।

वेब सीरीज को बैन करने की मांग अदालत में पहुंची

नेटफ्लिक्स सीरीज़ आईसी 814: द कंधार हाईजैक पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। सुरजीत सिंह यादव की याचिका में कहा गया है कि अनुभव सिन्हा द्वारा निर्देशित श्रृंखला ने आतंकवादियों को हिंदू नाम देकर उनकी वास्तविक पहचान को छिपाया गया है।

नेटफ्लिक्स के कंटेंट प्रमुख को मंत्रालय ने किया तलब

सरकार ने वेबसीरीज ‘आईसी-814 द कंधार हाइजैक’ में अपहर्ताओं के चित्रण को लेकर उठे विवाद के बाद ओटीटी मंच नेटफ्लिक्स के कंटेंट प्रमुख को तलब किया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने नेटफ्लिक्स इंडिया के कंटेंट प्रमुख को मंगलवार को बुलाया है और वेबसीरीज के कथित विवादास्पद पहलुओं पर स्पष्टीकरण देने को कहा है।

क्या है सारा विवाद, मामले ने कैसे पकड़ा तूल?

काठमांडू से दिल्ली की उड़ान भरने वाले इंडियन एयरलाइन्स के विमान के अपहर्ताओं के चित्रण से विवाद खड़ा हो गया है और कई दर्शकों ने इस पर आपत्ति जताई है। भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि आईसी-814 के अपहर्ता खूंखार आतंकवादी थे जिन्होंने अपनी मुस्लिम पहचान बदलने के लिए दूसरे नाम रख रखे थे।

मालवीय ने ‘एक्स’ पर लिखा, 'फिल्मकार अनुभव सिन्हा ने उनके गैर-मुस्लिम नामों को तवज्जो देकर अपनी आपराधिक मंशा को वैधता प्रदान की है।' उन्होंने कहा, 'कुछ दशक बाद लोग सोचेंगे कि हिंदुओं ने आईसी-814 का अपहरण किया था।' मालवीय ने कहा, 'पाकिस्तानी आतंकवादियों, जो सभी मुसलमान थे, के अपराधों को छिपाने के वामपंथी एजेंडे ने काम किया। यह सिनेमा की ताकत है, जिसका कम्युनिस्ट 70 के दशक से ही, शायद इससे पहले से ही आक्रामक तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं।'

उन्होंने कहा, 'इससे न केवल दीर्घावधि में भारत की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होगी/सवाल में आएगी, बल्कि उन धार्मिक समूहों का दोष हट जाएगा, जो रक्तपात के लिए जिम्मेदार रहे हैं।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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