देश

वैश्विक रिपोर्ट में अब नहीं चलेगा एजेंडा, रिपोर्ट के मुताबिक एक कदम और आगे बढ़ा भारत

  • Authored by: ललित राय
  • Updated May 27, 2023, 09:11 AM IST

India against agenda driven ranking: हाल के दिनों में दो रिपोर्ट सामने आई थी जिसमें प्रेस फ्रीडम मामले में भारत को अफगानिस्तान और पाकिस्तान से नीचे दिखाई थी। भारत का कहना है कि वैश्विक तौर जो रिपोर्ट तैयार की जा रही हैं उनमें आंकड़ों का इस्तेमाल सही ढंग से नहीं किया जा रहा है।

Image

नरेंद्र मोदी

India against agenda driven ranking: संजीव सान्याल, पीएम नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) की आर्थिक सलाहकार परिषद के प्रमुख सदस्य हैं। उन्होंने रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि अब वैश्विक मंचों पर भारत आवाज उठाने लगा है। भारत अब सक्रिय रूप से एजेंडा केंद्रित और नव साम्राज्यवाद के खिलाफ अपनी बात दुनिया के सामने रखने की योजना पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तरी अटलांटिक स्थित एक छोटा सा समूह उन सभी बिंदुओं को एकत्रित कर रहा है जो दुनिया के सामने सही एजेंडा रखने का काम कर रहे हैं। इस तरह के विचार में भ्रम जैसी कोई बात नहीं है, इसका सीधा असर व्यापार, निवेश और दूसरी गतिविधियों पर होगा। बता दें कि रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स(Reporters Without Borders) नाम की एक संस्था ने वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत की रैंकिंग अफगानिस्तान और पाकिस्तान से नीचे दिखाई थी। वहीं वी डेम संस्था( V-Dem Institute) ने एकेडमिक फ्रीडम इंडेक्स में रैंकिंग पाकिस्तान और भूटान से नीचे दिखाई है।

रिपोर्ट बनाने में आंकड़ों का सही इस्तेमाल नहीं

पिछले कुछ वर्षों से भारत ने अलग अलग बैठकों में वर्ल्ड बैंक, विश्व आर्थिक फोरम और यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्रान द्वारा जिन मानकों को रिपोर्ट बनाने में तैयार किया जा रहा है उसमें खामियों की तरफ इशारा किया है।सान्याल ने कहा कि विश्व बैंक इस चर्चा में शामिल है क्योंकि यह इन थिंक-टैंकों से राय लेता है।विश्व बैंक, WEF, रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स और V-DEM संस्थान ने टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत जवाब नहीं दिया। यूएनडीपी ने कहा कि वह जल्द ही जवाब देगा। सान्याल ने कहा कि पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ईएसजी) मानदंडों और संप्रभु रेटिंग के माध्यम से रेटिंग भी निर्णय लेने में कठोर हो जाती है। बहुपक्षीय विकास बैंक ईएसजी-अनुरूप परियोजनाओं के लिए रियायती ऋण प्रदान करते हैं।उन्होंने कहा कि कुछ ईएसजी मानदंड के पालन का विचार अपने आप में समस्या नहीं है। समस्या यह है कि इन मानदंडों को कैसे परिभाषित किया जाता है और कौन इन मानदंडों के अनुपालन को प्रमाणित या मापता है। वर्तमान में चीजें विकसित हो रही हैं, विकासशील देशों को बातचीत से पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है।

जी-20 मीटिंग पर खास जोर

भारत ने कहा है कि उसकी G20 अध्यक्षता के तहत विकासशील देशों के लिए एक वकील बनने की योजना है। सान्याल ने यह नहीं बताया कि क्या भारत ने देशों की रैंकिंग के मुद्दे को जी20 के साथ उठाया है।उन्होंने कहा कि ऐसे अन्य विकासशील देश भी हैं जो इस बारे में चिंतित हैं क्योंकि प्रभावी रूप से यह नव-उपनिवेशवाद का एक रूप है उन्होंने कहा कि संबंधित मंत्रालयों को बेंचमार्क स्थापित करने और रेटिंग एजेंसियों के साथ लगातार जुड़ने के लिए कहा गया है।

सूत्रों ने कहा कि भारत द्वारा देखे जा रहे कुछ आगामी सूचकांकों में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा वित्तीय विकास सूचकांक, यूएनडीपी द्वारा लिंग असमानता और मानव विकास सूचकांक, रसद प्रदर्शन और विश्व बैंक द्वारा विश्वव्यापी शासन संकेतक शामिल हैं।

ललित राय
ललित रायauthor

खबरों को सटीक, तार्किक और विश्लेषण के अंदाज में पेश करना पेशा है। पिछले 10 वर्षों से डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव है।

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!

संबंधित खबरें