Delhi Building Collapse: दिल्ली में सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत ढहने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। साथ ही कहा कि इस त्रासदी के लिए केवल इमारत मालिक ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि दिल्ली नगर निगम (MCD)और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की भी जिम्मेदारी बनती है। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
कोर्ट ने यहां तक कहा कि अगर अथॉरिटीज को कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पता होता और वे उसका पालन करतीं, तो इस तरह की घटनाओं को शायद टाला जा सकता था।
'2 मंजिल की अनुमति लेकर 6 मंजिल बना देते हैं'
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने PG मालिकों की ओर से कथित अवैध निर्माण पर भी सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने मौखिक तौर पर कहा कि PG मालिक लापरवाही से अवैध निर्माण करते हैं। कोर्ट ने कहा कि कई बार किसी बिल्डिंग को सिर्फ दो मंजिल बनाने की अनुमति होती है,लेकिन उसे छह मंजिल तक बना दिया जाता है और नींव वही रहती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में हादसे होना बेहद दुखद है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इससे ज्यादा दुखद कुछ नहीं हो सकता।'PG को रेगुलेट करने के लिए व्यवस्था होनी चाहिए'
हाईकोर्ट ने कहा कि PG को नियंत्रित करने के लिए उचित रेगुलेटरी फ्रेमवर्क होना जरूरी है। कोर्ट ने MCD से पूछा है कि क्या PG के लिए कोई नियामक व्यवस्था मौजूद है। कोर्ट ने MCD को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर दिल्ली के PG और हॉस्टल का ऑडिट करे। ऑडिट में यह भी पता लगाया जाएगा कि इन जगहों पर कितने छात्र रह रहे हैं।
DU में हॉस्टल की कमी,PG में रहने को मजबूर छात्र
कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हॉस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि DU के छात्रों के लिए हॉस्टल की संख्या पर्याप्त नहीं है, खासकर बाहर से आने वाले छात्रों के पास PG में रहने के अलावा कई बार कोई विकल्प नहीं बचता। कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पूछा है कि दिल्ली से बाहर के कितने छात्र पढ़ रहे हैं और उनके लिए कितने हॉस्टल उपलब्ध हैं?
MCD और DU से अलग-अलग जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने संबंधित संस्थाओं को अपनी-अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट करने को कहा है। MCD को बताना होगा:
- PG के लिए कोई रेगुलेटरी फ्रेमवर्क है या नहीं?
- PG और हॉस्टल में कितने छात्र रह रहे हैं?
- ऐसे भवनों का ऑडिट और नियमन कैसे किया जा रहा है?
वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को बताना होगा कि
- कितने आउटस्टेशन छात्र हैं और कितने हॉस्टल उपलब्ध हैं? इसके अलावा छात्रों के लिए हॉस्टल की व्यवस्था कितनी है।
- कोर्ट ने यह भी पता लगाने को कहा है कि संबंधित बिल्डिंग के लिए वैध अनुमति दी गई थी या नहीं और अगर कोई चूक हुई तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
'जिम्मेदारी सिर्फ मालिक की नहीं, अथॉरिटीज की भी'
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ किया कि ऐसी घटनाओं के लिए केवल बिल्डिंग मालिक को जिम्मेदार मानकर मामला खत्म नहीं किया जा सकता। अगर सरकारी एजेंसियों और स्थानीय अथॉरिटीज की ओर से अपने वैधानिक दायित्वों का पालन नहीं हुआ है, तो उनकी जवाबदेही भी तय करनी होगी।10 दिन में जवाब दाखिल करने का आदेश
अदालत सत्य निकेतन इमारत हादसे से संबंधित जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने संबंधित अधिकारियों को याचिका पर अपना-अपना जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। याचिका में घटना को लेकर तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी,जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए सोमवार को ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।किसने दाखिल की थी याचिका
लॉ स्टूडेंट अनिकेत कुमार गुप्ता ने वकील उमेश कुमार के जरिए यह याचिका दायर की है। इसमें दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों को पक्ष बनाया गया है। याचिका में छात्रों के जीवन और सुरक्षा के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित करने की मांग की गई है।
1 करोड़ रुपये का मुआवजा - हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों को 1-1 करोड़ की आर्थिक मदद और सभी घायलों को उचित मुआवजा दिया जाए। हादसे में दिव्यांग हुए छात्रों के लिए नौकरी की सुरक्षा की भी मांग की गई है।
दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई- याचिका में हादसे की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने की मांग की गई है। इसमें बिल्डिंग मालिक, ठेकेदार, बिल्डर, आर्किटेक्ट, स्ट्रक्चरल इंजीनियर और मरम्मत करने वाले मजदूरों की भूमिका की जांच कर जवाबदेही तय करने की बात कही गई है।
स्वतंत्र जांच कमेटी- इमारत गिरने की सटीक वजह जानने के लिए एक स्वतंत्र बनाने की मांग की गई है, जो यह पता लगाए कि बिल्डिंग आखिर क्यों गिरी और क्या वह स्वीकृत नक्शे और सुरक्षा मानकों के मुताबिक बनी थी। क्या इसमें अवैध मंजिलें जोड़ी गई थीं या पिलर से छेड़छाड़ की गई थी।
दिल्ली के प्रमुख छात्र इलाकों में तुरंत हो सेफ्टी ऑडिट
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि पहले सत्य निकेतन और फिर दिल्ली के तमाम प्रमुख छात्र इलाकों में बने पीजी व हॉस्टलों का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। इनमें विजय नगर, कमला नगर, हडसन लेन, गुरुमंडी, मुखर्जी नगर, गांधी विहार, नेहरू विहार, करोल बाग, ओल्ड राजेंद्र नगर और लक्ष्मी नगर इलाके शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि जांच में जो भी इमारतें असुरक्षित पाई जाएं, उन्हें तुरंत खाली कराकर सील किया जाए। साथ ही ऐसी इमारतों में रहने वाले छात्रों को सुरक्षित वैकल्पिक आवास मुहैया कराया जाए।
पीजी का पब्लिक डेटाबेस बनाने की मांग
याचिका में मांग की गई है कि जांच किए गए सभी पीजी और हॉस्टलों का एक सार्वजनिक डेटाबेस (ऑनलाइन पोर्टल) बनाया जाए। इसमें यह जानकारी हो कि किस बिल्डिंग का निरीक्षण हुआ है, उसकी स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेशन की स्थिति क्या है और वहां किस तरह के इस्तेमाल की अनुमति है।इससे छात्र और उनके माता-पिता रहने के लिए जगह चुनने से पहले जानकारी हासिल कर सकेंगे।
सबूत सुरक्षित रखने की मांग
याचिका में हादसे से जुड़े अहम सबूतों को सुरक्षित रखने के निर्देश देने की भी मांग की गई है। इनमें मलबा, बिल्डिंग का स्वीकृत नक्शा, नगर निगम के रिकॉर्ड, स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट, निरीक्षण रिपोर्ट, CCTV फुटेज और निर्माण या मरम्मत से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। PIL में घनी आबादी वाले छात्र इलाकों के लिए आपातकालीन रेस्क्यू प्रोटोकॉल बनाने की मांग भी की गई है। इसके तहत बिल्डिंग गिरने जैसी घटना में दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस, एंबुलेंस, NDRF और अन्य आपदा प्रबंधन एजेंसियों को तेजी से और मिलकर काम करने की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
मरम्मत के दौरान ढही इमारत
सत्य निकेतन में स्थित यह इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास थी और इसमें लड़कों के लिए पेइंग गेस्ट आवास संचालित हो रहा था। रविवार को इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था,तभी अचानक पूरी इमारत ढह गई।
