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कांग्रेस और ओवैसी में बढ़ रही करीबी! तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी अचानक क्यों करने लगे AIMIM चीफ की तारीफ?

Asaduddin Owaisi: तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवं रेड्डी ने कहा संसद में गरीब तबके की आवाज उठाने वाले नेताओं की संख्या कम हो गई है और असदुद्दीन ओवैसी उन चंद नेताओं में से हैं, जिन्होंने लोगों के लिए आवाज उठाई।

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तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी ने की ओवैसी की तारीफ।

Photo : Twitter

Asaduddin Owaisi: तेलंगाना में नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं। कांग्रेस और असदुद्दीन औवैसी करीब आ रहे हैं। इसका मजमून शनिवार को दिखाई दिया। जब तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद से सांसद और एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी की तारीफ में कसीदे पढ़े। रेड्डी ने कहा संसद में गरीब तबके की आवाज उठाने वाले नेताओं की संख्या कम हो गई है और असदुद्दीन ओवैसी उन चंद नेताओं में से हैं, जिन्होंने लोगों के लिए आवाज उठाई।

दरअसल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी की लिखी पुस्तक पैगंबर फॉर द वर्ल्ड का शनिवार को विमोचन किया। इस मौके पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी मौजूद थे।

'कांग्रेस के खिलाफ बोलते थे तभी अच्छा लगता था'

रेवंत रेड्डी ने कहा, जब असदुद्दीन ओवैसी कांग्रेस के खिलाफ बोलते थे, तब भी मुझे अच्छा लगा क्योंकि हमारा अपना भाई अपनी आवाज उठा रहा था। अगर कोई हमारे खिलाफ बोलता है, तो वह हमारा दुश्मन नहीं बन जाता। रेड्डी ने आगे कहा, सरकार चलाने में कुल गलतियां हो सकती हैं, उन गलतियों को सुधारने के लिए हमें एक मजबूत विपक्ष की जरूरत होती है, चाहें वह राज्य हो या फिर देश।

शांति का संदेश देती हैं गीता, कुरान और बाइबिल

रेवंत रेड्डी ने पुस्तक विमोचन समारोह में कहा, भगवद गीता, कुरान और बाइबिल दुनिया में केवल शांति का उपदेश देते हैं। सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथ सभी के कल्याण का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा, हमें उन लोगों को रोकने के लिए एक साथ खड़ा होना है जो जहर फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत हमारा देश है और इसकी सुरक्षा करना भी हमारा ही कर्तव्य है। देश को बचाने के लिए कोई और नहीं। चुनाव जीतने की कोशिश करना गलत नहीं है, लेकिन उन लोगों से सावधान रहने की जरूरत है, जो समाज में नफरत फैलाते हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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