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दिल्ली में अब पढ़ाने के साथ ही कुत्तों की गिनती करेंगे मास्टर साहब! शिक्षा निदेशालय के फरमान पर आप ने कसा तंज

दिल्ली के शैक्षणिक संस्थानों के आसपास आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में अब शिक्षकों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। शिक्षा निदेशालय (DoE) ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। हालांकि,शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि शैक्षणिक सत्र के दौरान ऐसी गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां शिक्षण कार्य को प्रभावित करेंगी,खासकर तब जब कई स्कूलों में प्री-बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं।

दिल्ली में टीचर्स करेंगे आवारा कुत्तों की गिनती

दिल्ली में टीचर्स करेंगे आवारा कुत्तों की गिनती

Photo : ANI

दिल्ली में शिक्षा निदेशालय ने शिक्षकों को स्कूलों में पढ़ाने के साथ ही आवारा कुत्तों के जुड़े कुछ नए निर्देश दिए हैं। इनमें सरकारी और निजी दोनों स्कूलों के शिक्षकों को शामिल किया गया है। वहीं, दूसरी ओर शिक्षा निदेशालय के इन निर्देशों को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी ने इसे लेकर दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार पर करारा हमला बोला है। आम आदमी पार्टी ने कहा कि शिक्षा निदेशालय के ताजा रवैये से पता चलता है कि इस सरकार की प्राथमिकता क्या है और बच्चों के भविष्य के प्रति सरकार का रवैया क्या है। वहीं, कई शिक्षक संगठनों ने भी इसे लेकर आपत्ति जताई है।

शिक्षा निदेशालय ने क्या निर्देश दिया है?

दिल्ली के शैक्षणिक संस्थानों के आसपास आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में अब शिक्षकों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। 5 दिसंबर को शिक्षा निदेशालय (DoE) के केयरटेकिंग ब्रांच ने इस बाबत सर्कुलर जारी किया था। इसमें कहा गया है कि जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे शिक्षकों को आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों के लिए नोडल अधिकारी नामित करें और उनकी जानकारी निदेशालय को भेजें। इसके बाद यह समेकित जानकारी मुख्य सचिव को सौंपी जाएगी।

नॉर्थ वेस्ट-ए जिले में उप शिक्षा निदेशक ने अलग-अलग स्कूलों के 118 शिक्षकों को इस कार्य के लिए नामित करने का आदेश जारी किया है। साथ ही तीन जोनों के लिए तीन शिक्षकों को जोनल नोडल अधिकारी भी बनाया गया है। सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि जिला स्तर पर तैयार रिपोर्ट ही स्वीकार की जाएगी,अलग-अलग स्कूलों की व्यक्तिगत रिपोर्ट मान्य नहीं होंगी। साझा की जाने वाली जानकारी में नोडल अधिकारी का नाम,पद,संपर्क नंबर और ईमेल आईडी शामिल होगी। यह जानकारी स्कूलों, स्टेडियमों और खेल परिसरों के बाहर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना भी अनिवार्य होगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

शिक्षा निदेशालय ने अपने नए निर्देशों के पीछे सुप्रीम कोर्ट के 7 नवंबर के आदेश का हवाला दिया। निदेशालय ने कहा कि यह कदम सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा है और इसे सुप्रीम कोर्ट के 7 नवंबर के आदेश तथा 20 नवंबर को हुई बैठक में जारी निर्देशों के तहत लागू किया जा रहा है। सर्कुलर में इसे शीर्ष प्राथमिकता वाला कार्य बताया गया है।

क्यों जारी हुए निर्देश और शिक्षकों को क्या करना होगा?

दरअसल, दिल्ली में आवारा कुत्तों संख्या बड़ी तेजी से बढ़ी है, इतना ही नहीं वे हिंसक भी हुए हैं। बीते दिनों बच्चों को कुत्तों के काटने के कई मामले सामने आए थे,जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट तक ये बात पहुंची थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने भी कई निर्देश जारी किए थे। आवारा कुत्तों को लेकर विशेष तौर पर स्कूलों के आसपास बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने अब सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को स्कूल परिसर और उसके आसपास मौजूद आवारा कुत्तों पर नजर रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इसके तहत शिक्षकों को यह जानकारी जुटानी होगी कि आवारा कुत्ते किन इलाकों में ज्यादा घूमते हैं और क्या उनकी मौजूदगी से बच्चों को कोई खतरा हो सकता है। यदि किसी क्षेत्र में कुत्तों की संख्या अधिक हो या बच्चों पर हमले की आशंका नजर आए,तो इसकी तुरंत सूचना संबंधित विभागों को देनी होगी।

क्या स्कूल शिक्षक आवारा कुत्तों की गिनती करेंगे?

नहीं, किसी भी स्कूल के शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती करने का काम नहीं सौंपा गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 5 दिसंबर को जारी परिपत्र मात्र 20 नवंबर को जारी पूर्व सूचना का अनुवर्ती है। इन दोनों परिपत्रों में से किसी में भी आवारा कुत्तों की गिनती के संबंध में कोई निर्देश नहीं हैं। 20 सितंबर को जारी मूल परिपत्र में निम्नलिखित निर्देश स्पष्ट रूप से उल्लिखित थे-

    सभी शिक्षण संस्थानों, कार्यालयों और स्टेडियमों में तैनात नोडल अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार हैं कि आवारा कुत्ते परिसर में प्रवेश न करें।

  • यदि किसी भी स्थान पर आवारा कुत्ते एकत्रित होते या आश्रय लेते हुए पाए जाते हैं, तो स्थानीय अधिकारियों को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए ताकि उचित सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।
  • कार्यालय और स्टेडियम के प्रभारी अधिकारियों को छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए नियमित जागरूकता अभियान चलाने का कार्य सौंपा गया है, जिसमें कुत्ते के काटने की घटनाओं, विशेष रूप से बच्चों से जुड़े मामलों पर प्रतिक्रिया देने के बारे में मार्गदर्शन शामिल है।
  • शिक्षक संगठन कर रहे विरोध

    शिक्षा निदेशालय के इन निर्देशों को लेकर राजनीतिक दलों ही नहीं शिक्षक संगठनों ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब आवारा पशुओं से जुड़ा मामला है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित पशु कल्याण विभागों को क्यों नहीं दी जा रही। संगठनों का कहना है कि बार-बार गैर-शैक्षणिक कार्य सौंपे जाने से शिक्षकों की गरिमा और पढ़ाई दोनों प्रभावित होती हैं। सरकारी शिक्षक संघ के अध्यक्ष संत राम ने कहा कि शिक्षकों ने हमेशा जरूरत पड़ने पर अपनी सेवाएं दी हैं,खासकर कोविड-19 महामारी के दौरान। लेकिन कार्यदिवसों में गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां सौंपना छात्रों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षकों को स्कूल के दिनों में सिर्फ पढ़ाने पर ध्यान देने दिया जाए तो यह समाज और देश के हित में होगा। ऐसी ड्यूटी छुट्टियों में दी जा सकती है, लेकिन शैक्षणिक सत्र के दौरान शिक्षकों को भटकाना बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है।

    आम आदमी पार्टी ने भी खोला मोर्चा

    वहीं, आम आदमी पार्टी ने इसे लेकर रेखा गुप्ता सरकार पर करारा तंज कसा है। आम आदमी पार्टी ने कहा कि जब अरविंद केजरीवाल की सरकार थी तब शिक्षकों को विदेश भेज कर ट्रेनिंग कराई जाती थी। वहीं अब रेखा गुप्ता की सरकार है,जो टीचर्स की ट्रेनिंग तो दूर,उल्टा उन्हें कुत्ता गिनने जैसे कामों में लगा रही है। इससे पता चलता है कि इस सरकार की प्राथमिकता क्या है और बच्चों के भविष्य के प्रति सरकार का रवैया क्या है।

    इन राज्यों में पहले भी हो चुका है ऐसा

    गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश,जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी शिक्षकों को पशु-संबंधी कार्यों में तैनात करने जैसे निर्देश जारी हो चुके हैं।

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    शिव शुक्ला
    शिव शुक्ला author

    शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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