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25 दिन बाद घर लौटे 'तारक मेहता' के सोढ़ी, पुलिस को बताई लापता होने की वजह

Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah: तारक मेहता का उल्टा चश्मा टीवी शो के सोढ़ी उर्फ गुरुचरण सिंह अपने घर वापस लौट आए हैं। वह 22 अप्रैल से लापता थे। घर वापस लौटने के बाद गुरुचरण सिंह ने बताया है कि वह आध्यात्मिक यात्रा पर घर से दूर गए थे, लेकिन बाद में उन्होंने वापस लौटने का फैसला किया।

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तारक मेहरा उल्टा चश्मा के एक्टर गुरुचरण सिंह 25 दिन बाद घर वापस लौटे

Photo : Twitter

Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah: तारक मेहता का उल्टा चश्मा टीवी शो के सोढ़ी मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, टीवी शो में सोढ़ी का किरदार निभाने वाले एक्टर गुरुचरण सिंह 17 मई को अपने घर वापस लौट आए हैं। वह करीब 25 दिन से लापता था। 22 अप्रैल को पुलिस में उनकी मिसिंग रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि घर वापस आने के बाद गुरुचरण सिंह का बयान कोर्ट में दर्ज करा दिया गया है, वह आध्यात्मिक यात्रा पर घर से दूर गए थे।

गुरुचरण सिंह ने पुलिस को बताया कि वह दुनियादारी छोड़कर आध्यात्मिक यात्रा पर निकल गए थे। उन्होंने बताया कि वह कई दिनों तक अमृतसर रुके थे। यहां रुकने के बाद वह लुधियाना जैसे कई शहरों के गुरुद्वारों में रुके। इसके बाद उन्हें अहसास हुआ कि अब उन्हें वापस अपने पिता के पास लौट जाना चाहिए तो वे वापस घर आ गए।

22 अप्रैल को मुंबई जाने के लिए निकले थे

बता दें, 22 अप्रैल को गुरुचरण सिंह अपने घर से मुंबई जाने के लिए निकले थे, लेकिन जब वह मुंबई नहीं पहुंचे तो उनके घर वाले और दोस्त परेशान हो गए। इसके बाद 26 अप्रैल को टीवी एक्टर के लालता होने की खबर सामने आई और गुरुचरण के पिता ने अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी पुलिस में दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने इसे किडनैपिंग का केस मानकर अपनी जांच शुरू कर दी। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला किया गुरुचरण सिंह 24 अप्रैल तक दिल्ली में ही मौजूद थे, इसी के बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया था।

तारक मेहता में सोढ़ी के किरदार से हुए फेमस

गुरुचरण सिंह को तारक मेहता का उल्टा चश्मा शो ने ही पहचान दिखाई। उन्होंने इस शो में 2008 से 2013 तक काम किया, इसके बाद उन्होंने शो को अलविदा कह दिया। इसके पीछे शो के मेकर्स असित कुमार मोदी से उनके विवाद की वजह बताई गई। हालांकि, बाद में वह वापस शो का हिस्सा बने और 2020 तक काम किया। बता दें, ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि गुरुचरण सिंह की शादी होने वाली थी और वह आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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