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Video: रामचरित मानस पर जुबानी जंग अब हाथापाई तक, होटल में भिड़े मौर्य और महंत राजूदास

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Feb 16, 2023, 09:49 AM IST

Swami Prasad Maurya : इस घटना के बाद मौर्य ने पुलिस से अपने लिए अतिरिक्‍त सुरक्षा की मांग की है। लखनऊ पुलिस कमिश्‍नर को लिखे पत्र में मौर्य ने आरोप लगाया है कि एक चैनल के कार्यक्रम में हिस्‍सा लेने के दौरान उन पर महंत राजू दास, परमहंस दास और उनके समर्थकों ने तलवार और फरसे से हमला किया।

Swami Prasad Maurya : रामचरित मानस पर छिड़ी जुबानी जंग अब हाथापाई पर उतर आई है। दिल्ली के एक होटल में समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य और हनुमान गढ़ी के महंत राजूदास आपस में भिड़ गए। दोनों के बीच हाथापाई हुई। सामने आए वीडियो में मौर्य और महंत को एक-दूसरे से उलझते देखा जा सकता है। बताया जा रहा है कि दोनों के समर्थकों के बीच मारपीट भी हुई। मौर्य ने महंत राजूदास पर पहले धमकाने का आरोप लगाया है जबकि महंत का कहना है कि मौर्य ने उन्हें भगवा आतंकी कहा। यह घटना बुधवार की है। दोनों लोग एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में शरीक होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।

होटल कर्मचारियों ने बीच-बचाव किया

इस घटना के बाद मौर्य ने पुलिस से अपने लिए अतिरिक्‍त सुरक्षा की मांग की है। लखनऊ पुलिस कमिश्‍नर को लिखे पत्र में मौर्य ने आरोप लगाया है कि एक चैनल के कार्यक्रम में हिस्‍सा लेने के दौरान उन पर महंत राजू दास, परमहंस दास और उनके समर्थकों ने तलवार और फरसे से हमला किया। महंत का कहना है कि मौर्य ने रामचरित मानस का अनादर किया है इसलिए उन पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। टीवी कार्यक्रम में बहस के दौरान महंत और मौर्य के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। लॉबी में दोनों के आपस में उलझता और हाथापाई होता देख होटल के सुरक्षाकर्मी वहां पहुंचे और बीच-बचाव किया।

रामचरित मानस के बारे में मौर्य ने क्या कहा था

सपा नेता ने कुछ दिनों पहले रामचरित मानस की कुछ चौपाइयों पर विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि कई करोड़ लोग रामचरित मानस नहीं पढ़ते। यह तुलसीदास ने अपनी खुशी के लिए लिखा है। सरकार को रामचरित मानस के आपत्तिजनक अंश हटाना चाहिए या इस पूरी पुस्तक को ही बैन कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'ब्राह्मण भले ही दुराचारी, अनपढ़ या गंवार हो, लेकिन वह ब्राह्मण है। उसको पूजनीय कहा गया है, लेकिन शूद्र कितना भी पढ़ा-लिखा या ज्ञानी हो। उसका सम्मान मत करिए। क्या यही धर्म है? अगर, धर्म यही है, तो मैं ऐसे धर्म को नमस्कार करता हूं। जो धर्म हमारा सत्यानाश चाहता है, उसका सत्यानाश हो।'
आलोक कुमार राव
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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