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बंगाल में पहली बार BJP का CM, सुवेंदु की ‘सेना’ के आगे कैसे ढह गया ममता दीदी का किला?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव करते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता हासिल कर ली है और सुवेंदु अधिकारी राज्य के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। विधायक दल की बैठक में उन्हें नेता चुना गया और 9 मई 2026 को वे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। बीजेपी की इस जीत के पीछे भ्रष्टाचार, शिक्षक भर्ती घोटाला, संदेशखाली विवाद, आरजी कर मेडिकल कॉलेज केस और ममता सरकार के खिलाफ बढ़ती एंटी-इंकंबेंसी को बड़ा कारण माना जा रहा है। भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी की हार ने चुनाव को ऐतिहासिक बना दिया।

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सुवेंदु अधिकारी की लीडरशिप में बंगाल में बीजेपी ने टीएमसी को दी शिकस्त। AI IMAGE/ PTI

Suvendu Adhikari: बंगाल में सुवेंदु सरकार का 'सूर्योदय' होने जा रहा है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में भाजपा विधायक दल के नेता चुने गए, जिससे उनके राज्य में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया।

बंगाल में बीजेपी (BJP) की यह जीत सिर्फ चुनावी आंकड़ा नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। बीजेपी की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे कई बड़े मुद्दे रहे। ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ बढ़ती नाराजगी, भ्रष्टाचार के आरोप, शिक्षक भर्ती घोटाला, आरजी कर मेडिकल कॉलेज केस और कानून-व्यवस्था पर उठे सवालों ने जनता के बीच असंतोष पैदा किया। बीजेपी ने इन्हीं मुद्दों को जोरदार तरीके से चुनावी मैदान में उठाया और खुद को बदलाव के विकल्प के तौर पर पेश किया।

चुनाव में टीएमसी को सबसे बड़ा राजनीतिक झटका तब लगा जब भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने हरा दिया। यह सीट लंबे समय से ममता का मजबूत गढ़ मानी जाती थी। बीजेपी ने उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल तक कई इलाकों में जबरदस्त प्रदर्शन किया और 206 से ज्यादा सीटों के साथ सत्ता तक पहुंच गई।

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बीजेपी विधायक दल की बैठक की फाइल फोटो। AI IMAGE/ PTI

बीजेपी की सफलता का क्या रहा सबसे बड़ा फैक्टर?

विश्लेषकों के मुताबिक, बीजेपी की जीत के पीछे एससी-एसटी और शहरी वोटरों का समर्थन, संगठन की मजबूत रणनीति और बूथ स्तर तक की तैयारी अहम वजह रही। वहीं, कई इलाकों में अल्पसंख्यक वोटों के बंटवारे ने भी तृणमूल कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया।

ध्रुवीकरण और 'SIR' का मुद्दा

चुनाव आयोग द्वारा किए गए 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) ने इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाई। वोटर लिस्ट से हटाए गए लाखों नामों को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए, लेकिन बीजेपी ने इसे "घुसपैठियों के खिलाफ सफाई" के रूप में पेश किया। हिंदू मतों के अभूतपूर्व ध्रुवीकरण ने बीजेपी के पक्ष में वह लहर पैदा की, जिसे 'दीदी' का कल्याणकारी योजनाओं वाला कार्ड भी नहीं रोक पाया।

बीजेपी ने चुनाव प्रचार में विकास, महिलाओं की सुरक्षा, सरकारी कर्मचारियों के डीए, युवाओं को नौकरी और भ्रष्टाचार मुक्त शासन जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा। प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल में लगातार रैलियां कर चुनाव को हाई-वोल्टेज बना दिया।

भ्रष्टाचार और 'एंटी-इंकंबेंसी' की लहर

शिक्षक भर्ती घोटाला, संदेशखाली की घटना और राशन वितरण में हुई कथित अनियमितताओं को बीजेपी ने चुनावी रैलियों में प्रमुखता से उठाया। बंगाल की जनता, खासकर युवा वर्ग, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर बदलाव चाहता था। 'दीदी' के प्रति दशकों पुराना भरोसा इस बार भर्ती घोटालों की भेंट चढ़ गया।

इस चुनाव की सबसे चौंकाने वाली बात रही कि टीएमसी के पारंपरिक अल्पसंख्यक वोट बैंक में बिखराव दिखा। मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे इलाकों में, जहाँ टीएमसी का एकतरफा राज था, वहां इस बार वोटों का बंटवारा हुआ। कांग्रेस की आंशिक वापसी और 'SIR' के डर ने टीएमसी के इस 'सेफ्टी नेट' को कमजोर कर दिया, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला।

9 मई 2026 को सुवेंदु अधिकारी बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। बीजेपी के लिए यह जीत केवल एक राज्य की सत्ता नहीं, बल्कि उसकी वैचारिक जीत है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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