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मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को जमानत मिलेगी या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने वापस लिया आदेश; जानें क्या है मामला

Supreme Court withdraws order in Abbas Ansari Case: उत्तर प्रदेश के मऊ से विधायक अब्बास अंसारी की मुश्किलें कब कम होंगी? अदालत से उन्हें जमानत मिलेगी या नहीं ये बड़ा सवाल है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने अब्बास अंसारी मामले में आदेश वापस लिया और पूछा कि क्या उनके खिलाफ कोई जांच लंबित है। आपको पूरा मामला रिपोर्ट में बताते हैं।

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अब्बास अंसारी।

Abbas Ansari: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपना वह आदेश वापस ले लिया जिसमें पुलिस को ‘गैंगस्टर’ अधिनियम के तहत उत्तर प्रदेश के विधायक अब्बास अंसारी के खिलाफ जांच 10 दिन के भीतर पूरी करने को कहा गया था। न्यायालय ने इसके बजाय पुलिस से यह जानना चाहा कि क्या विधायक के खिलाफ कोई जांच लंबित है।

अब्बास अंसारी के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में क्या कहा?

दिवंगत ‘गैंगस्टर’ मुख्तार अंसारी के बेटे अंसारी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि जांच पूरी हो गई है और ‘उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम’ के तहत मामले में आरोप पत्र दायर किया गया है। इसके बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मामले में अगली सुनवाई के लिए छह मार्च की तारीख तय की।

सिब्बल ने कहा कि राज्य ने मामले में गलत हलफनामा दाखिल किया है और अंसारी के खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है।

सिब्बल ने राज्य के हलफनामे में गलत जानकारी देने का लगाया आरोप

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने कहा कि उन्हें इस मामले पर और स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। सिब्बल ने कहा कि राज्य ने अपने हलफनामे में गलत जानकारी दी है कि चार सह-आरोपी फरार हैं, जबकि मामले में आरोपपत्र के अनुसार कोई अन्य आरोपी नहीं है।

इसके बाद, पीठ ने दिन में पहले पारित आदेश को वापस ले लिया तथा राज्य सरकार से जांच की स्थिति बताते हुए एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। दिन में पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस को ‘गैंगस्टर अधिनियम’ के तहत अंसारी के खिलाफ मामले की जांच 10 दिन के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया था। पीठ ने कहा था कि मामले की जांच पूरी होने के बाद वह अंसारी की जमानत याचिका पर विचार करेगी।

अब्बास अंसारी पर क्या है आरोप, किस मामले में मांगी जमानत?

जमानत याचिका उस मामले से जुड़ी है जिसमें अंसारी पर राज्य के चित्रकूट जिले में कथित तौर पर एक गिरोह संचालित करने का आरोप है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार द्वारा दायर हलफनामे पर भरोसा किया था, जिसमें कहा गया था कि मामले में जांच जारी है और जांच अधिकारी ने कहा है कि उसे जमानत पर रिहा करना जांच के लिए ठीक नहीं होगा।

पीठ ने अधिकारी की इस दलील का हवाला दिया कि अंसारी एक जेल अधिकारी को रिश्वत देने में कामयाब हो गया है और अगर उसे जमानत पर रिहा किया गया तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है। अंसारी ने मुठभेड़ के डर से 31 जनवरी को ‘गैंगस्टर’ अधिनियम के तहत एक मामले में अधीनस्थ अदालत की कार्यवाही में डिजिटल माध्यम से पेश होने का अनुरोध किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल को हाईकोर्ट जाने को कहा

अब्बास अंसारी ने दलील दी थी कि वह कासगंज की जेल से डिजिटल माध्यम से अदालत में पेश हो रहा था, लेकिन बाद में यह सुविधा बंद कर दी गई। शीर्ष अदालत ने अंसारी की जमानत याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था। अदालत ने डिजिटल माध्यम से सुनवाई की याचिका इस आधार पर खारिज कर दी कि याचिका में कोई इस बारे में कोई अनुरोध नहीं किया गया है। अदालत ने सिब्बल से कहा कि वह याचिका लेकर उच्च न्यायालय जाएं।

पिछले साल 18 दिसंबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस मामले में अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। चित्रकूट जिले के कोतवाली कर्वी थाने में 31 अगस्त, 2024 को अंसारी, नवनीत सचान, नियाज अंसारी, फराज खान और शाहबाज आलम खान के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक क्रियाकलाप (रोकथाम) अधिनियम, 1986 की धारा दो, तीन के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन पर जबरन वसूली और मारपीट का आरोप लगाया गया था।

अंसारी मऊ निर्वाचन क्षेत्र से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विधायक हैं। जमानत याचिका खारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि मामले में जांच जारी है। इस मामले में अंसारी को छह सितंबर, 2024 को गिरफ्तार किया गया था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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