Supreme Court on Stray Dogs Case: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में दायर की जा रही इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशंस की असामान्य रूप से ज्यादा संख्या पर गौर किया। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि इतने ज़्यादा एप्लीकेशंस तो इंसानों के मामलों में भी नहीं देखे जाते। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने यह तब नोटिस किया जब दो वकीलों ने कोर्ट के सामने अपने द्वारा दायर इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन का ज़िक्र किया। जस्टिस संदीप मेहता ने कहा, 'इतने ज्यादा एप्लीकेशंस आमतौर पर इंसानों के मामलों में भी नहीं आते।'
आज सुनवाई
वकीलों द्वारा दायर ट्रांसफर याचिका की सुनवाई की रिक्वेस्ट पर जवाब देते हुए, कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई बुधवार को होनी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस केस से जुड़ी सभी अर्जियों पर उसी दिन सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी भरोसा दिलाया कि बेंच सभी वकीलों की बात सुनेगी।
जस्टिस नाथ, मेहता और एन वी अंजारिया की तीन-जजों की स्पेशल बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। बता दें कि आवारा कुत्तों का मुद्दा पिछले साल 28 जुलाई को शुरू किए गए एक स्वतः संज्ञान मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांचा जा रहा है। यह मामला उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद शुरू हुआ था, जिसमें कुत्तों के काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी, खासकर राष्ट्रीय राजधानी में बच्चों में रेबीज के मामलों में वृद्धि की बात कही गई थी।
इससे पहले, 7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थानों के परिसर में कुत्तों के काटने की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि पर ध्यान दिया था।
क्या था आदेश?
इसमें ऐसे इलाकों से आवारा कुत्तों को तुरंत स्टेरिलाइजेशन और वैक्सीनेशन के बाद तय शेल्टर में शिफ्ट करने का निर्देश दिया गया था। इसमें यह भी साफ किया गया कि कुत्तों को उन जगहों पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें उठाया गया था।
कोर्ट ने अधिकारियों को नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और एक्सप्रेसवे से सभी मवेशियों और दूसरे आवारा जानवरों को हटाने का भी निर्देश दिया था।
SC ने कहा कि संस्थागत इलाकों में कुत्ते के काटने की घटनाओं का बार-बार होना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को दिखाता है, बल्कि इन जगहों को रोकी जा सकने वाली खतरों से बचाने में सिस्टम की नाकामी को भी दिखाता है।
