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Hijab Case:फिलहाल जारी रहेगा हिजाब पर बैन ,SC के खंडित फैसले का असर

  • Agency by: Agency
  • Updated Oct 13, 2022, 01:14 PM IST

Supreme Court On Hijab Case: 15 मार्च को कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम की जरूरी प्रैक्टिस का हिस्सा नहीं है। उसके इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा था। और अब सुप्रीम कोर्ट में 2 जजों की बेंच ने अलग-अलग फैसला दिया है।

KEY HIGHLIGHTS
  • चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यू.यू.ललित 9 नवंबर 2022 को रिटायर हो रहे हैं।
  • कर्नाटक हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि छात्राएं स्कूल यूनिफॉर्म पहनने से मना नहीं कर सकती हैं।
  • कर्नाटक में हिजाब विवाद जनवरी 2022 में उडुपी के एक सरकारी कॉलेज से शुरू हुआ था।

Hijab Case Decision In Supreme Court:कर्नाटक में हिजाब बैन मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। मामले की सुनवाई कर रही 2 जजों की बेंच ने अलग-अलग राय दी है। इस कारण अंतिम फैसला नहीं हो पाया। अब पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश यू.यू.ललित के पास भेज दिया गया है। जिसे वह आगे की सुनवाई के लिए बड़ी बेंच को भेजेंगे। और नई गठित बेंच पूरे मामले की नए सिरे से सुनवाई करेगी। और जब तक बड़ी बेंच का फैसला नहीं आता है, उस वक्त तक कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला जारी रहेगा। यानी अभी कर्नाटक में स्कूल में हिजाब बैन जारी रहेगा। इसके पहले 15 मार्च को कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम की जरूरी प्रैक्टिस का हिस्सा नहीं है।

अब क्या करेंगे चीफ जस्टिस

सुप्रीम कोर्ट के खंडित फैसले का क्या होगा असर, इस पर सुप्रीम कोर्ट के वकील डी.के.गर्ग ने टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल को बताया कि चूंकि दोनों जजों की हिजाब मामले पर राय अलग-अलग है। इसलिए अब यह मामला बड़ी बेंच के पास जाएगा। और उस वक्त तक कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला बना रहेगा। यानी स्कूलों में हिजाब बैन बना रहेगा। जब तक सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच फैसला नहीं सुनाएगी, उस वक्त तक यह फैसला बना रहेगा।

चूंकि मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पास गया है तो वह अब उसे बड़ी बेंच को भेज देंगे। परिपाटी के अनुसार अब हिजाब का मामला 3 जजों की बेंच के पास जाएगा। जिस पर अब बहुमत के आधार पर फैसला होगा।

अब फिर से होगी सुनवाई

चीफ जस्टिस यू.यू.ललित 9 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में संभावना यही है कि वह दो जजों के बेंच के फैसले के बाद, इसे जल्द ही बड़ी खंड पीठ को भेज देंगे। गर्ग के अनुसार अब पूरे मामले को नई बेंच सुनेगी, तो जाहिर है उसका फैसला आने में कुछ समय लगेगा। कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। और फैसले के खिलाफ 26 याचिकाएं दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि हाईकोर्ट ने धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को देखे बिना हिजाब बैन पर फैसला सुना दिया।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने क्या सुनाया था फैसला

कर्नाटक में हिजाब विवाद जनवरी 2022 के शुरुआत में उडुपी के एक सरकारी कॉलेज से शुरू हुआ था। जहां मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनकर आने से रोका गया था। स्कूल मैनेजमेंट ने इसे यूनिफॉर्म कोड के खिलाफ बताया था। इसके बाद दूसरे शहरों में भी यह विवाद फैल गया। जिसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा। उस पर कर्नाटक हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि छात्राएं स्कूल में यूनिफॉर्म पहनने से मना नहीं कर सकती हैं। साथ ही स्कूल को यूनिफॉर्म तय करने का अधिकार है। इसके मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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