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दल-बदल कानून की व्याख्या पर कपिल सिब्बल की याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

सिब्बल ने पीठ को बताया कि गोवा में विधायकों के दल-बदल से भी जुड़ा ऐसा ही एक मामला न्यायालय में लंबित है। इसके बाद पीठ ने उनकी याचिका को गोवा से संबंधित मामले के साथ संबद्ध कर दिया।

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कपिल सिब्बल (फाइल फोटो)

उच्चतम न्यायालय ने निर्दलीय राज्यसभा सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की उस याचिका की सुनवाई को लेकर सोमवार को सहमति जताई, जिसमें संविधान की दसवीं अनुसूची की उस व्याख्या पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया है, जिसके तहत विधायक और सांसद किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय का दावा कर दल-बदल रोधी कानून के तहत अयोग्यता से बच सकते हैं।

न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि इस मामले में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनपर संसद को विचार करने की आवश्यकता है।

'उपयुक्त व्यवस्था तैयार करना भी संसद का ही दायित्व'

सिब्बल ने कहा कि इस मुद्दे का 'हमारी राजनीति पर व्यापक प्रभाव' पड़ता है, क्योंकि इस प्रावधान के कारण अल्पमत में रहने वाला दल बहुमत में आ सकता है, जबकि बहुमत वाला दल अल्पमत में बदल सकता है।पीठ ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के लिए बनायी गयी दसवीं अनुसूची संसद द्वारा पारित की गई थी और इसके लिए उपयुक्त व्यवस्था तैयार करना भी संसद का ही दायित्व है।

दल-बदल से भी जुड़ा ऐसा ही एक मामला न्यायालय में लंबित

सिब्बल ने पीठ को बताया कि गोवा में विधायकों के दल-बदल से भी जुड़ा ऐसा ही एक मामला न्यायालय में लंबित है। इसके बाद पीठ ने उनकी याचिका को गोवा से संबंधित मामले के साथ संबद्ध कर दिया।

सिब्बल ने यह याचिका व्यक्तिगत रूप से दायर की है

सिब्बल ने यह याचिका व्यक्तिगत रूप से दायर की है और कानून की व्याख्या किए जाने का अनुरोध किया है। उन्होंने 22 जुलाई को अपनी याचिका पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा था कि यह मामला इस प्रश्न से जुड़ा है कि क्या संसद की संरचना इस प्रकार बदली जा सकती है, जैसा कि इस देश में हो रहा है, और इस संदर्भ में दसवीं अनुसूची के अनुच्छेद चार की क्या व्याख्या होनी चाहिए।

यह याचिका ऐसे समय में दायर की गई है, जब आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कुछ सांसद दसवीं अनुसूची के विलय संबंधी प्रावधानों का सहारा लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) तथा अन्य राजनीतिक दलों में शामिल हुए हैं।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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