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'विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ याचिका पर दो महीने में फैसला करें विधानसभा अध्यक्ष', दलबदल मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

दलबदल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। शीर्ष कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ याचिका पर दो महीने में फैसला करने को कहा है। उनपर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद बीजेपी में शामिल होने का आरोप है। विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ याचिका जुलाई 2024 से लंबित है।

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सुप्रीम कोर्ट

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

मध्य प्रदेश की बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दलबदल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष को निर्देश दिया है कि वे निर्मला सप्रे के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करें। यह याचिका जुलाई 2024 से लंबित है।

कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि निर्मला सप्रे ने 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में उन्होंने बीजेपी का साथ देना शुरू कर दिया। सिंघार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने अदालत में पक्ष रखा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दलबदल की याचिकाओं पर जल्द फैसला जरूरी

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि विधायक निर्मला सप्रे पर उस राजनीतिक दल की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने का आरोप है, जिसके टिकट पर वह विधानसभा के लिए निर्वाचित हुई थीं। इसी आधार पर उनके खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का मामला बनता है।

अदालत ने कहा कि इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दाखिल की गई थी, लेकिन अब तक उस पर फैसला नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का भी रुख किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि मामले में कोई तात्कालिकता नहीं है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि भले ही अदालत को किसी मामले में तत्काल सुनवाई की जरूरत महसूस न हो, लेकिन दसवीं अनुसूची से जुड़े ऐसे मामलों का निपटारा तेजी से किया जाना चाहिए। संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दायर अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला होना अपेक्षित है।

विवेक तन्खा ने कहा- ढाई साल बीत गए

सुनवाई के दौरान विवेक तन्खा ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट में मामला आदेश के लिए सुरक्षित रखा गया था। इसके बाद नोटिस जारी हुआ। विधानसभा अध्यक्ष ने भी मामले को सुना और फिर आदेश के लिए रख दिया, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं आया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में ढाई साल बीत चुके हैं और विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने में अभी दो साल बाकी हैं। ऐसे में जल्द फैसला होना जरूरी है।

तन्खा ने पहले तीन सप्ताह के भीतर फैसला करने का अनुरोध किया। इस पर चीफ जस्टिस ने तीन महीने का समय देने की बात कही। हालांकि, तन्खा के दो महीने के भीतर फैसला करने के अनुरोध पर चीफ जस्टिस ने सहमति जताई और विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने के भीतर याचिका का निपटारा करने का निर्देश दिया।

क्या है पूरा मामला?

निर्मला सप्रे ने 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर बीना सीट से जीत दर्ज की थी। आरोप है कि बाद में उन्होंने बीजेपी का समर्थन करना शुरू कर दिया और बीजेपी के पक्ष में प्रचार भी किया। इसे संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल और विधायक की अयोग्यता का आधार बताते हुए कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दाखिल की थी। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विधानसभा अध्यक्ष को इस याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करना होगा।
Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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