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TMC नेता अभिषेक बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, ED के समन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

School Jobs Scam Case: स्कूल जॉब्स स्कैम में ईडी कई बार अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुचिरा बनर्जी से पूछताछ कर चुकी है। हालांकि, इस मामले में अभिषेक बनर्जी कई बार ईडी के सामने पेश भी नहीं हुए हैं। उन्होंने ईडी के समन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी।

Photo : BCCL

School Jobs Scam Case: तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी के समन को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। दोनों ने दावा किया कि कलकत्ता उनका सामान्य निवास स्थान है, ऐसे में वह ED की पूछताछ के लिए दिल्ली में पेश नहीं हो सकते हैं। उन्होंने ईडी के समन को चुनौती दी थी।

बता दें, स्कूल जॉब्स स्कैम में ईडी कई बार अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुचिरा बनर्जी से पूछताछ की है। हालांकि, इस मामले में अभिषेक बनर्जी कई बार ईडी के सामने पेश भी नहीं हुए हैं। बता दें, इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 13 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने फैसला सुनाया।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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