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अतीक-अशरफ हत्याकांड की होगी सुप्रीम जांच, 24 अप्रैल को मामले पर सुनवाई करेगी शीर्ष अदालत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 18, 2023, 04:17 PM IST

Atiq Ahmed Killing: अतीक अहमद और उसके भाई के हत्याकांड पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। कोर्ट 24 अप्रैल को मामले की सुनवाई करेगी। इसके अलावा योगी सरकार में हुए 183 एनकाउंटर की जांच की मांग वाली याचिका पर भी सुनवाई होगी।

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अतीक-अशरफ हत्याकांड

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Atiq Ahmed Killing: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। इस मामले में दाखिल एक याचिका को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मंजूरी दे दी। शीर्ष अदालत अब इस मामले में 24 अप्रैल को सुनवाई करेगी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में 2017 से अब तक हुए 183 एनकाउंटर की जांच के लिए भी सुप्रीम कोर्ट राजी हो गया है। याचिका में इन एनकाउंटर की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में स्वतंत्र कमेटी बनाने की मांग की गई थी।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ से कहा कि याचिकाओं की विचारणीयता के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए मुद्दे पर पहले सुनवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह यह अनुरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि यह मामला संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। हमने इस शुरुआती आपत्ति को उठाते हुए एक आवेदन दायर किया है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि बेंच व्यापक मुद्दों को समझने के लिए कुछ समय के लिए पहले याचिकाकर्ताओं को सुनेगी। हमें योग्यता पर तर्क देखना होगा। यह हमारे दिमाग में गुम नहीं होगा और हम आपको बाद के चरण में सुनेंगे। हमें 15-20 मिनट में एक तस्वीर चाहिए। पहले हम याचिकाकर्ताओं को सुनें। हम याचिकाकर्ताओं की दलीलों को पहले से नहीं टाल सकते।

बता दें, बीते दिनों प्रयागराज में माफिया अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह हत्या पुलिस हिरासत में हुई। बता दें, अतीक और अशरफ को ऑन कैमरा गोली मारी गई थी, जब उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए लाया जा रहा था। हत्या के बाद तीनों आरोपियों ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था। पुलिस ने तीनों आरोपियों लवलेश तिवारी, अरुण मौर्य और सनी सिंह को नैनी से प्रतापगढ़ जेल भेज दिया है।

घटना की सीबीआई जांच की मांग

इस मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। अमिताभ ठाकुर ने घटना पर कई सवाल उठाते हुए कहा है कि इस तरह के मामलों की सीबीआई से जांच कराना बहुत जरूरी है।

एसआइटी व न्यायिक आयोग का हुआ है गठन

इस सनसनीखेज हत्याकांड के लिए मामले में न्यायिक आयोग का गठन किया गया है। इसके अलावा सोमवार को तीन सदस्यीय एसआईटी का भी कठन किया गया था। राज्य सरकार का कहना है कि वह इस मामले में बहुत गंभीर है। वहीं प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वह यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दोनों माफिया बंधुओं की हत्या के पीछे किसका हाथ है। जल्द ही इस मामले में खुलासा हो सकता है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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