BRICS Summit Dinner Menu Row: भारत की मेजबानी में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता के बीच अब उसके रात्रिभोज (डिनर मेन्यू) को लेकर भारतीय राजनीति में बयानों के तीर चलने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत मंडपम में विदेशी मेहमानों और राष्ट्रध्यक्षों के लिए आयोजित किए गए शुद्ध शाकाहारी रात्रिभोज पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर जोरदार पलटवार किया है। भाजपा ने कहा कि जब विपक्ष के पास इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन की कमियां निकालने के लिए केवल भोजन का मेन्यू ही बचा हो, तो समझ लेना चाहिए कि यह शिखर सम्मेलन कितना ऐतिहासिक और सफल रहा है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर रात्रिभोज के मेन्यू का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा देशवासियों पर अपनी पसंद थोपने के बाद अब विदेशी मेहमानों पर भी इसे थोप रही है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी विविधताओं और बेहतरीन मांसाहारी व्यंजनों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, लेकिन सरकार ने इस पहलू को छिपाने का काम किया है। इसी क्रम में राहुल गांधी ने भी किसी सीधे जिक्र के बिना अपनी बहन के हाथ के बने छोले-भटूरे की तस्वीर पोस्ट करते हुए देश के स्वाद और विविधता पर अपनी बात रखी।
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भाजपा का पलटवार
कांग्रेस के इन बयानों पर हमला बोलते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी भारत के एक मजबूत वैश्विक मध्यस्थ के रूप में उभरने से पूरी तरह कुंठित हो चुकी है। वहीं, भाजपा प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी 'नाराज फूफा' वाली मानसिकता को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जा रही है। उन्होंने चुटकी लेते हुए पूछा कि क्या चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कांग्रेस नेताओं को वॉट्सऐप करके शिकायत की थी कि उन्हें खाना पसंद नहीं आया? क्या कांग्रेस के मुख्यमंत्री सिर्फ इसलिए डिनर में नहीं आए क्योंकि उन्हें उनकी पसंद का खाना नहीं मिला?
'नई दिल्ली घोषणापत्र' के जरिए भारत ने दुनिया के सामने रखी अपनी बात
भाजपा ने साफ किया कि 'नई दिल्ली घोषणापत्र' के जरिए भारत ने दुनिया के सामने अपनी साख बनाई है और सभी ब्रिक्स देश पहली बार गंभीर वैश्विक मुद्दों पर एक सुर में बात कर रहे हैं। ऐसे समय में जब दुनियाभर में देश का मान बढ़ रहा है, तब खाने की मेज को लेकर ऐसी बचकानी बयानबाजी करना विपक्ष के निराशाजनक रवैये और उसकी संकीर्ण मानसिकता को उजागर करता है।
