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छत्तीसगढ़ में वंदे भारत पर पथराव, कई कोच के शीशे तोड़े; 5 गिरफ्तार

Stones Pelted on Vande Bharat Train: छत्तीसगढ़ के महासमुंद में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर पथराव किया गया है। इससे ट्रेन के तीन कोच के शीशे टूट गए, जिसके बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

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वंदे भारत पर पथराव करने वाले पांचों आरोपी गिरफ्तार।

Photo : Twitter

Stones Pelted on Vande Bharat Train: वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। खबर है कि छत्तीसगढ़ में वंदे भारत ट्रेन पर पथराव हुआ है। यहां महासमुंद में बागबाहरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पर पथराव किया गया, जिससे कई कोच के शीशे टूट गए। सूचना मिलने के बाद रेलवे पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

अधिकारियों ने बताया कि वंदे भारत पर पथराव करने वाले पांचों आरोपी बागबाहरा के ही रहने वाले हैं। उनके खिलाफ आरपीएफ पुलिस रेलवे एक्ट 1989 के तहत मामला दर्ज किया गया है। रेलवे पुलिस ने बताया कि पथराव में वंदे भारत के C2-10 , C4-1,C9-78 के शीशे टूट गए।

ट्रायल रन के दौरान हुई पत्थरबाजी

अधिकारियों ने बताया कि महासमुंद से 16 सितंबर से वंदे भारत चलने वाली थी। इसका ट्रायल रन किया जा रहा था। ट्रेन करीब 7:10 बजे महासमुंद से निकली और 9 बजे जब ट्रेन बागबाहरा पहुंची, तभी कुछ असमाजिक तत्वों ने उस पर पत्थरबाजी की। सूचना मिलते ही एक टीम मौके पर पहुंची और पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पहचान शिव कुमार बघेल, देवेंद्र कुमार, जीतू पांडे, सोनवानी और अर्जुन यादव के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि इन में से आरोप शिव कुमार बघेल लोकल पार्षद का भाई है। अधिकारियों ने बताया कि पांचों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।

पहले भी हुई हैं घटनाएं

बता दें, वंदे भारत एक्सप्रेस पर हमले की पहले भी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बीते बुधवार को लखनऊ से पटना जा रही वंदे भारत ट्रेन पर वाराणसी के बाद पत्थरबाजी हुई थी। आरोपी ने पत्थर मारकर ट्रेन के शीशे को क्षतिग्रस्त कर दिया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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