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वंदे भारत ट्रेन पर फिर पथराव: दिल्ली-देहरादून रूट पर फेंके गए पत्थर; जनवरी के बाद से सातवीं घटना

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 19, 2023, 06:50 AM IST

Vande Bharat Express: मुजफ्फरनगर स्टेशन के पास वंदे भारत ट्रेन पर पत्थर फेंके गए हैं। एक्सप्रेस ट्रेन के E1 कोच को निशाना बनाया गया। जनवरी के बाद से वंदे भारत पर पथराव की यह सातवीं घटना है।

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वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव

Photo : BCCL

Vande Bharat Express: वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन (Vande Bharat) पर एक बार फिर पथराव (Stone pelting at Vande Bharat Express) की घटना सामने आई है। इस बार दिल्ली-देहरादून रूट (Dehradun-Delhi Vande Bharat Express) पर मुजफ्फरनगर स्टेशन के पास वंदे भारत ट्रेन पर पत्थर फेंके गए हैं। जानकारी के मुताबिक, एक्सप्रेस ट्रेन के E1 कोच को निशाना बनाया गया। रेलवे (Indian Railway) अधिकारियों का कहना है कि इस घटना के दौरान किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। जनवरी के बाद से वंदे भारत पर पथराव की यह सातवीं घटना है।

वहीं, दूसरी ओर पथराव की इस घटना के बाद रेलवे एक्शन के मूड में हैं। पथराव करने वाले आरोपियों की धरपकड़ के लिए

दिल्ली मंडल की ओर से आरपीएफ(RPF) को लगाया गया है। बता दें, पिछले महीने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-देहरादून रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी।

केरल में भी फेंके गए थे पत्थर

इससे पहले मई में केरल में भी वंदे भारत पर पथराव की घटना सामने आई थी। यहां केरल की पहली वंदे भारत को निशाना बनाया गया था। वहीं, छह अप्रैल को विशाखापत्तनम में भी वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव किया था। फिर जनवरी में भी विशाखापत्तनम में वंदे भारत ट्रेन में मेंटेनेंस के दौरान पथराव किया गया था, इस दौरान एक कोच का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया था।

पश्चिम बंगाल में भी हुआ था पथराव

ऐसी ही एक घटना 12 मार्च को पश्चिम बंगाल से सामने आई थी। यहां, वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को निशाना बनाया गया था। इस घटना में हाई-स्पीड ट्रेन के एक कोच की खिड़की के शीशे क्षतिग्रस्त हो गए थे। घटना पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का के पास हुई थी। जनवरी दार्जिलिंग जिले के फांसीदेवा क्षेत्र के पास वंदे भारत के दो डिब्बों को निशाना बनाया गया था। जनवरी में मालदा के पास भी ऐसी ही एक घटना हुई थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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