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CJP Protest: सोनम वांगचुक का सरकार पर हमला, बोले- प्रदर्शन की अनुमति न देना खतरनाक, हो सकते हैं गंभीर परिणाम

Sonam Wangchuk on Protest: सोनम वांगचुक ने मुंबई में IPF फेस्टिवल में बोलते हुए कहा कि प्रदर्शन सरकारों के बेहतर काम करने का एक बेहतरीन तंत्र है। अगर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

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सोनम वांगचुक (फोटो साभार- PTI)

Sonam Wangchuk on Protest: जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। मुंबई में 24 अक्टूबर को IPF फेस्टिवल में बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रदर्शन सरकारों के बेहतर काम करने का एक बेहतरीन तंत्र है। अगर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं। वांगचुक ने इसके लिए श्रीलंका और बांग्लादेश में हुई अशांति का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब लोगों को अपनी बात कहने का मौका नहीं दिया जाता, तो हालात बिगड़ते हैं। श्रीलंका और बांग्लादेश में जो हुआ, वह इसी का नतीजा है।

'भारत में प्रदर्शन की जगह संसद से काफी दूर'

उन्होंने कहा कि दुनिया भर के देश खुशी-खुशी प्रदर्शनों की अनुमति देते हैं, और वो भी संसद के ठीक सामने। वांगचुक ने कहा, "दरअसल सभी देशों में संसद के सामने का हिस्सा ही प्रदर्शन का चेहरा होता है।" उन्होंने यूनाइटेड किंगडम, नॉर्वे और स्वीडन जैसे देशों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां संसद के ठीक सामने प्रदर्शन की अनुमति है। लेकिन भारत में स्थिति अलग है। भारत में प्रदर्शन की जगह संसद से बहुत दूर रखी गई है। यहां तक कि जब प्रदर्शन के लिए सिर्फ जंतर-मंतर की जगह थी, तब भी वह बहुत दूर थी।

सरकार ने बदली प्रदर्शन की जगह

वांगचुक ने आगे कहा, "विरोध प्रदर्शन एक महान तंत्र है, एक फीडबैक है, सरकारों के बेहतर प्रदर्शन करने के लिए एक पिछला मूल्य है, अगर वे इसे देखें।" उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार द्वारा प्रदर्शन को लेकर सख्ती बरती जा रही है। गौरतलब है कि हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। हालांकि, सरकार ने प्रदर्शन की जगह बदल दी। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार की आलोचना कर रहा है।

'विरोध प्रदर्शन की नहीं मांगी जानी चाहिए अनुमति'

वांगचुक ने कहा, "देखिए जब विरोध प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दी जाती तो क्या होता है। यही उदाहरण श्रीलंका, बांग्लादेश का है।" उन्होंने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिए कोई अनुमति नहीं मांगी जानी चाहिए। परमिशन सिर्फ यह देखने के लिए होनी चाहिए कि शहर में क्या हो रहा है, जैसे कोई त्योहार है या नहीं।

Aditya Sahu
आदित्य साहूauthor

आदित्य साहू टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स और ट्रेडिंग कंटेंट लिखतें हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद वह पिछले 10 सालों से मीडिया में सक्रिय हैं। स्पोर्ट्स इवेंट की रियल टाइम कवरेज, डाटा टॉपिक्स और अनोखे कंटेंट आइडियाज को आकर्षक और एंगेजिंग तरीके से प्रस्तुत करना आदित्य की खासियत है। उनकी कॉपी राइटिंग और इंटरेस्टिंग हेडलाइन बनाने की क्षमता उन्हें डिजिटल दुनिया में अलग पहचान देती है। 15,000 से अधिक बायलाइन स्टोरी पब्लिश कर चुके आदित्य का लक्ष्य हर खबर को यूनिक एंगल और स्टोरीटेलिंग के रोचक अंदाज में पेश करना है।

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