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VIDEO: नारकोटिक्स के वाहन को मारी टक्कर, अधिकारियों पर चलाई गोली; और फिल्मी स्टाइल में भागा तस्कर

Crime in Rajasthan: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में तस्करों का आतंक देखने को मिला है। जहां बेखौफ तस्कर बिल्कुल फिल्मी स्टाइल में भाग गया। उन्होंने नारकोटिक्स के वाहन को टक्कर मारी। इस दौरान ताबड़तोड़ फायरिंग भी हुई। गोलीबारी में एक अधिकारी घायल हो गया। जबकि दो अन्य को चोट लगी है।

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राजस्थान में तस्करों का आतंक।

Chittorgarh: चित्तौड़गढ़ जिले में उदयपुर सिक्सलेन स्थित नारायणपूरा टोल नाका के पर शुक्रवार तड़के नाकाबंदी के दौरान मादक पदार्थ तस्करों ने नीमच नारकोटिक्स के वाहन को टक्कर मार दी। वहीं बाद में तस्कर फायरिंग करते हुए फिल्मी स्टाइल में मौके से फरार हो गए। करीब आधे से 1 मिनट चले इस घटनाक्रम में फायरिंग में नारकोटिक्स का एक अधिकारी तो तस्करों के वाहन की टक्कर लगने पर दो अधिकारी घायल हुए हैं। घायलों को चिकित्सालय ले जाया गया है। मौके से लाखों रुपए मूल्य का 345 किलो डोडा चुरा बरामद किया है। इस संबंध में प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है। मामले में एक आरोपित की गिरफ्तारी भी हुई है।

इनोवा कार में मादक पदार्थ तस्करी की मिली थी खबर

जानकारी में सामने आया कि मध्यप्रदेश में स्थित केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो नीमच की टीम को खुफिया सूचना मिली थी कि गुजरात नंबर प्लेट वाली टोयोटा इनोवा कार में मादक पदार्थ तस्करी होगी। इसमें सवार दो व्यक्ति चित्तौड़गढ़ जिले के मंगलवाड़ क्षेत्र से बाड़मेर (राजस्थान) क्षेत्र के लिए डोडा चूरा के जा रहे हैं। इस सूचना के आधार पर सीबीएन नीमच की टीम का गठन किया गया और उन्हें शुक्रवार सुबह जल्दी रवाना किया गया।

टीम ने संदिग्ध मार्ग पर कड़ी निगरानी रखी गई। तस्करों के वाहन को चित्तौड़गढ़-उदयपुर हाईवे पर नारायणपुरा टोल प्लाजा के पास पहुंचाया गया। वाहन की पहचान होने पर सीबीएन अधिकारियों ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन तस्करों ने रास्ता रोक रही विभागीय गाड़ी से सीधा टक्कर मार दी। सतर्क सीबीएन अधिकारियों ने वाहन को उसके चालक सहित सफलतापूर्वक रोका।

अधिकारियों पर गोली चलाकर फरार हुआ तस्कर

वाहन में सवार दूसरे व्यक्ति ने सीबीएन अधिकारियों पर गोली चलाई और फरार हो गया। फायरिंग में एक अधिकारी घायल हो गया और वाहन से टकराव के कारण दो अधिकारी घायल हो गए। सुरक्षा और अन्य व्यावहारिक कारणों से वाहन की तत्काल तलाशी मौके पर लेना संभव नहीं था। इसलिए उसे सीबीएन कार्यालय लाया गया। यहां वाहन की पूरी तलाशी ली गई।

इसमें 17 बोरों में भरा कुल 345.940 किलो डोडा चूरा बरामद किया। कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद मौके से जब्त किए डोडा चूरा व वाहन को सीज कर दिया। साथ ही एक व्यक्ति को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टेंस एक्ट, 1985 की संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में नारकोटिक्स का अग्रिम अनुसंधान जारी है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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