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सिगरेट से बेहतर है निकोटीन पाउच', एक्सपर्ट्स ने क्यों कहा ऐसा? देश में स्मोकिंग से हर साल 13.5 लाख लोगों की मौत

Smoking In India: भारत में हर साल तंबाकू सेवन से लगभग 13.5 लाख लोगों की मौत होती है और स्वास्थ्य सेवाओं पर 1.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान छोड़ने की दर बेहद कम है, इसलिए धुआं-मुक्त निकोटीन विकल्प जैसे सुरक्षित विकल्पों को अपनाना जरूरी है। अध्ययनों के मुताबिक ये विकल्प धूम्रपान से 95% तक कम हानिकारक हैं और स्वीडन, नॉर्वे, अमेरिका जैसे 34 देशों में लोकप्रिय हो चुके हैं।

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धूम्रपान से हर साल 13.5 लाख भारतीयों की मौत, विशेषज्ञों ने दी निकोटीन के विकल्पों के प्रयोग की सलाह।(फोटो सोर्स: iStock)

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Smoking In India: तंबाकू से हर साल 13.5 लाख भारतीयों की मौत होती है लेकिन व्यापक जागरूकता के बावजूद धूम्रपान छोड़ने की दर बहुत कम है। भारत में तंबाकू से संबंधित बीमारियों पर सालाना 1.77 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च पर स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञों ने धूम्रपान-मुक्त निकोटीन विकल्पों के उपयोग सहित नयी व विज्ञान-समर्थित हानि न्यूनीकरण रणनीतियों की आवश्यकता पर बल दिया।

दिल्ली के बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पल्मोनरी मेडिसिन के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. पवन गुप्ता ने बताया कि ‘क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज’ (सीओपीडी) या हृदय संबंधी जोखिम वाले रोगियों के लिए सिगरेट से परहेज करना महत्वपूर्ण है। गुप्ता ने कहा, “रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन (ब्रिटेन) की समीक्षा सहित वैज्ञानिक समीक्षाएं दर्शाती हैं कि निकोटीन युक्त गोलियां या फिर तंबाकू को जलाए बिना निकोटीन प्रदान करने वाले विकल्पों में धूम्रपान की तुलना में काफी कम जोखिम होता है। इस प्रमाण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

धुआं-मुक्त निकोटीन विकल्प धूम्रपान की तुलना में 95 प्रतिशत तक कम हानिकारक

‘पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड’ नामक संस्था ने अनुमान लगाया कि धुआं-मुक्त निकोटीन विकल्प धूम्रपान की तुलना में 95 प्रतिशत तक कम हानिकारक हैं। विश्व स्तर पर निकोटीन पाउच सिगरेट के विकल्प के रूप में लोकप्रिय हो रहे हैं। ये उत्पाद अब स्वीडन, नॉर्वे, अमेरिका और डेनमार्क सहित 34 देशों में उपलब्ध हैं।

एम्स-सीएपीएफआईएमएस केंद्र के फिजियोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. सुनैना सोनी ने कहा, “भारत में धूम्रपान छोड़ने के पारंपरिक तरीकों को अक्सर सीमित सफलता मिलती है। सुरक्षित, तंबाकू-मुक्त निकोटीन विकल्प को अगर सख्ती से नियंत्रित किया जाए तो धूम्रपान करने वालों को सिगरेट छोड़ने में मदद मिल सकती है।”

समय आ गया है कि हम सुरक्षित निकोटीन पर विचार करें: प्रोफेसर डॉ. सुनैना सोनी

उन्होंने कहा, “न धुआं, न टार, न जलाना, यही सबसे बड़ा अंतर है। विज्ञान कहता है और अब समय आ गया है कि हम सुरक्षित निकोटीन पर विचार करें।” सोनी ने बताया कि निकोटीन पाउच जोखिम-मुक्त नहीं हैं लेकिन जब इन्हें धूम्रपान के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो ये विश्व स्वास्थ्य संगठन के एनसीडी वैश्विक लक्ष्य के तहत 2025 तक तंबाकू के उपयोग को 30 प्रतिशत तक कम करने के भारत के घोषित लक्ष्य की ओर बढ़ने में एक सार्थक भूमिका निभा सकते हैं।

भारत में तंबाकू के इस्तेमाल की दर बहुत ज्यादा है और हर दस में से एक भारतीय की तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण असमय मौत हो जाती है। रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, भारत में धूम्रपान छोड़ने की दर कम बनी हुई है और केवल लगभग सात प्रतिशत धूम्रपान करने वाले ही बिना किसी सहायता के सफलतापूर्वक धूम्रपान छोड़ पाते हैं।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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