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मुख्‍तार गैंग का शूटर अनुज कन्नौजिया मारा गया, लंबे समय से जमशेदपुर में छिपकर रह रहा था इनामी बदमाश

Shooter of Mukhtar Gang Killed in Jamshedpur: झारखंड के जमशेदपुर में मुठभेड़ में उत्तर प्रदेश के मुख्तार गैंग का इनामी बदमाश मारा गया। अनुज कन्नौजिया पर यूपी पुलिस ने ढाई लाख रुपए का इनाम रखा था और पुलिस को कई संगीन मामलों में उसकी तलाश थी। बताया जा रहा है कि वो लंबे समय से जमशेदपुर में छिपकर रह रहा था।

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एनकाउंटर में मारा गया यूपी के मुख्‍तार गैंग का शूटर अनुज कन्नौजिया।

Jamshedpur Encounter: झारखंड के जमशेदपुर में मुठभेड़ में 2.5 लाख रुपये का इनामी बदमाश मारा गया। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (यूपी स्पेशल टास्क फोर्स, कानून व्यवस्था) अमिताभ यश ने बताया, "जमशेदपुर में यूपी एसटीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम के साथ भारी गोलीबारी में मुख्तार गिरोह का शूटर अनुज कन्नौजिया मारा गया।"

मारा गया यूपी के मुख्‍तार गैंग का शूटर अनुज कन्नौजिया

उत्तर प्रदेश के मुख्‍तार गैंग का शूटर अनुज कन्नौजिया जमशेदपुर में एनकाउंटर में मारा गया। यह घटना शनिवार की देर रात जमशेदपुर के गोविंदपुर के भूमिहार सदन के पास हुई है। जहां उत्तर प्रदेश एसटीएफ (गोरखपुर यूनिट) और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने कुख्यात शूटर को घेर लिया। इसके बाद दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई, मुठभेड़ में अनुज कन्नौजिया को पुलिस ने मार गिराया।

लंबे समय से जमशेदपुर में छिपकर रह रहा था अनुज

अनुज पर यूपी पुलिस ने ढाई लाख रुपए का इनाम रखा था और पुलिस को कई संगीन मामलों में उसकी तलाश थी। पुलिस ने मौके से हथियार और अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किया है। अनुज पर गाजीपुर, मऊ व अन्य जिलों में कई मुकदमे दर्ज थे। वह लंबे समय से जमशेदपुर में छिपकर रह रहा था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मऊ, गाजीपुर और आजमगढ़ जिलों के विभिन्न थानों में कनौजिया के खिलाफ 23 मामले दर्ज हैं।

मुठभेड़ के दौरान दोनों ओर से चली 60 से 70 राउंड गोलियां

शनिवार रात पुलिस उसके ठिकाने पर पहुंची, चारों ओर से पुलिस ने घेराबंदी कर रखा था। इसी दौरान अपराधी ने घर के अंदर से गोलियां चला दी। गोली एसटीएफ के एक अधिकारी को लगी, जिसके जवाब में एसटीएफ की ओर से भी कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने बताया कि टीम का नेतृत्व कर रहे एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक डीके शाही को गोली लगी है। दोनों ओर से 60 से 70 राउंड गोलियां चली, जिसमें अनुज मारा गया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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