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गृह विभाग की मांग पर अड़ी शिवसेना! महाराष्ट्र में कब तक स्पष्ट होगी मंत्रिमंडल की स्थिति; जानें सबकुछ

Maharashtra Politics: सूत्रों ने दावा किया है कि महाराष्ट्र में महायुति के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर अब तक बात नहीं बन पाई है। गृह विभाग की मांग को लेकर शिवसेना अड़ी हुई है। दावा ये भी किया गया है कि मंत्रिमंडल गठन पर आठ दिसंबर तक स्थिति स्पष्ट होगी।

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एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस

Eknath Shinde Demands for Department in Maharashtra Cabinet: ‘महायुति’ के सहयोगियों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर गहन विचार-विमर्श और एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के गृह मंत्रालय पर जोर देने के बीच मंत्रिमंडल के गठन पर स्थिति रविवार तक स्पष्ट होने की उम्मीद है। देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल का विस्तार 11 या 12 दिसंबर को होने की संभावना है। पिछले महीने हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के ‘महायुति’ गठबंधन को भारी बहुमत मिलने के बावजूद, आंतरिक खींचतान और दबाव के कारण, नए मुख्यमंत्री ने पांच दिसंबर को शपथ ली। राज्य में 20 नवंबर को हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए थे।

गृह मंत्रालय की मांग पर अड़ी शिंदे की शिवसेना

सूत्रों ने शनिवार को संकेत दिया कि फडणवीस के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने तथा एकनाथ शिंदे और अजित पवार के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ अब ध्यान नये मंत्रिमंडल के गठन पर केंद्रित हो गया है, जो कि काफी मुश्किल होने वाला है। पूर्व मुख्यमंत्री शिंदे के उपमुख्यमंत्री बनने पर सहमति जताने के बाद उदय सामंत और संजय शिरसाट जैसे नेताओं ने खुले तौर पर गृह मंत्रालय शिवसेना को आवंटित करने की मांग की है।

विभागों के आवंटन, मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा कब?

भाजपा और राकांपा के सूत्रों ने बताया कि ‘महायुति’ के तीनों सहयोगी दलों और गठबंधन के नेताओं की आंतरिक बैठकों में विभागों के आवंटन सहित मंत्रिमंडल की संरचना पर चर्चा की जा रही है। भारी चुनावी जनादेश ने ‘महायुति’ गठबंधन के लिए बहुत बड़ी समस्या खड़ी कर दी है, क्योंकि प्रत्येक सहयोगी ने चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया है। ‘महायुति’ ने 288 सदस्यीय सदन में 230 सीटें जीतीं, जबकि विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए) केवल 46 सीटें ही जीत पाई। एमवीए में कांग्रेस, शिवसेना (यूटीबी) और राकांपा (एसपी) शामिल हैं।

किसके खाते से कितने मंत्री बनाए जाने के आसार?

सूत्रों के अनुसार, 132 सीटों के साथ ‘महायुति’ की अगुवाई करने वाली भाजपा के मुख्यमंत्री सहित 21-22 मंत्री पद अपने पास रखने की उम्मीद है। शिवसेना को 11 से 12 विभाग मिल सकते हैं और अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा को नौ से 10 पद दिए जा सकते हैं। महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 43 मंत्री हो सकते हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मंत्रिमंडल विस्तार में शपथ लेने वाले मंत्रियों की संख्या पर अंतिम फैसला दो से तीन दिन में लिया जाएगा।’’

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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