पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त भूचाल आया हुआ है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे आंतरिक घमासान के बीच अब एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा में विधायक दल के टूटने के बाद अब टीएमसी के 'संसदीय दल' (लोकसभा और राज्यसभा सांसदों) में भी बड़ी बगावत होने की पूरी संभावना नजर आ रही है। मतलब बदले हुए माहौल में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के अपने अब उनका साथ छोड़ रहे हैं।
20 सांसद बीजेपी के संपर्क में, लेकिन पेंच फंसा
राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के अनुसार, टीएमसी के लगभग 20 सांसद इस समय भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं। हालांकि, इस पर बीजेपी की तरफ से प्रतिक्रिया अलग है। पहले ही प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने साफ कर रखा है कि फिलहाल बीजेपी के दरवाजे टीएमसी के नेताओं के लिए बंद हैं। ऐसे में अब यह सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि यदि बीजेपी के दरवाजे बंद हैं, तो क्या ये 20 सांसद टीएमसी से बगावत करने वाले उस दूसरे 'बागी खेमे' के संपर्क में हैं जो पार्टी पर वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहा है? क्या टीएमसी का हाल शिवसेना और एनसीपी जैसा होने वाला है?
| बागी सांसद (संभावित) | ममता खेमे में बरकरार सांसद |
| काकोली घोष दस्तीदार | अभिषेक बनर्जी |
| सुखेंदु शेखर रॉय | महुआ मोइत्रा |
| शताब्दी रॉय | डेरेक ओ'ब्रायन |
| जून मालिया | सुदीप बंदोपाध्याय |
| रचना बनर्जी | कल्याण बनर्जी |
| शत्रुघ्न सिन्हा | डोला सेन |
| माला रॉय |
चुनाव आयोग और कोर्ट की जंग
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बागी खेमा पूरी पार्टी पर अपना दावा ठोकना चाहता है और आधिकारिक तौर पर टीएमसी पर कब्जा करना चाहता है, तो उन्हें न केवल विधायकों की बल्कि सांसदों की भी एक बड़ी संख्या अपने पाले में दिखानी होगी। यह पूरा मामला आगे चलकर कानूनी लड़ाई में तब्दील होना तय है और यह जंग कोर्ट से लेकर चुनाव आयोग के दरवाजे तक जाएगी। ऐसे समय में चुनाव आयोग का नियम बहुत स्पष्ट है—आयोग यह देखता है कि मूल पार्टी के कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों (विधायकों और सांसदों) में से बहुमत की संख्या किस खेमे के पास ज्यादा है।ममता बनर्जी की आखिरी चाल
इसी कानूनी पेंच को भांपते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बेहद चालाकी भरा कदम उठाया है। उन्होंने किसी भी तरह की संगठित बगावत को रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से पार्टी की सभी मौजूदा इकाइयां (Units) भंग कर दी हैं, ताकि बागी खेमा तकनीकी रूप से मजबूत न हो सके।
