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राजकीय सम्मान के साथ पटना में आज होगा शारदा सिन्हा का अंतिम संस्कार

Sharda Sinha's last rites: अपने लोक गीतों से भारतीय संगीत जगत में अपनी विशेष पहचान बनाने वाली मशहूर लोक गायिका ने मंगलवार को दुनिया को अलविदा कह दिया। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने ये घोषणा की है कि शारदा सिन्हा का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

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शारदा सिन्हा, फाइल फोटो।

Photo : Twitter

Bihar: देश और दुनिया में मशहूर लोक गायिका शारदा सिन्हा का अंतिम संस्कार पटना में राजकीय सम्मान के साथ होगा। शारदा सिन्हा का निधन मंगलवार को दिल्ली में हुआ। बुधवार की सुबह उनका पार्थिव शरीर पटना के लिए रवाना हो गया था। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को घोषणा की है कि बिहार कोकिला, पद्म श्री एवं पद्म भूषण से सम्मानित स्वर्गीय शारदा सिन्हा का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ होगा।

बेटे ने बताया, कहां होगा शारदा सिन्हा का अंतिम संस्कार

शारदा सिन्हा के बेटे अंशुमान सिन्हा कहते हैं, "हम कल सुबह तक उनका अंतिम संस्कार करने की योजना बना रहे हैं। चूंकि मेरे पिता का अंतिम संस्कार गुलबी घाट पर किया गया था, इसलिए उनका अंतिम संस्कार भी वहीं करना बेहतर होगा।"

राजकीय सम्मान के साथ होगा शारदा सिन्हा का अंतिम संस्कार

मुख्यमंत्री ने शारदा सिन्हा के निधन की सूचना मिलते ही स्थानिक आयुक्त नई दिल्ली को शारदा सिन्हा के परिवार के सदस्यों से समन्वय स्थापित कर उनका पार्थिव शरीर वायुयान से पटना भेजने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी पटना को निर्देश दिया है कि राजकीय सम्मान के साथ शारदा सिन्हा के अंतिम संस्कार के लिए सभी आवश्यक व्यवस्था ससमय सुनिश्चित करेंगे।

Sharda Sinha Last Rites

शारदा सिन्हा के अंतिम संस्कार से जुड़ा अपडेट

सीएम नीतीश कुमार ने शारदा सिन्हा के निधन पर क्या कुछ कहा?

इससे पहले सीएम नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर शोक व्यक्त करते हुए पोस्ट लिखा था, "बिहार कोकिला, पद्म श्री एवं पद्म भूषण से सम्मानित शारदा सिन्हा जी का निधन दुःखद। वह मशहूर लोक गायिका थीं। उन्होंने मैथिली, बज्जिका, भोजपुरी के अलावा हिन्दी गीत भी गाए थे। उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में भी अपनी मधुर आवाज दी थी। स्व. शारदा सिन्हा जी के छठ महापर्व पर सुरीली आवाज में गाए मधुर गाने बिहार और उत्तर प्रदेश समेत देश के सभी भागों में गूंजा करते हैं। उनके निधन से संगीत के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। उनकी आत्मा की चिर शांति तथा उनके परिजनों एवं प्रशंसकों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना है।"

मशहूर लोक गायिका शारदा सिन्हा का मंगलवार की रात निधन हो गया। वह 72 साल की थीं। कुछ दिन पहले बीमारी के कारण उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। सोमवार को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें वेंटीलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया था। उनके निधन की खबर सुनकर बिहार के लोग मर्माहत हैं। आम से लेकर खास लोग उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहे हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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