Sharad Pawar on PM Degree: राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने पीएम की डिग्री और शिक्षा के मुद्दे पर विपक्ष की मुहिम की फिर हवा निकाल दी है। पवार ने कहा कि जो भी नेताओं की डिग्री का मुद्दा उठा रहे हैं, वह गलत है। ऐसे वक्त पर जब देश कई बड़ी समस्याओं से गुजर रहा है, किसी नेता की शिक्षा पर सवाल उठाया सही नहीं है। बता दें कि उद्धव ठाकरे और अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया जैसे नेताओं ने पीएम मोदी की डिग्री पर सवाल उठाए थे।
गैरजरूरी मुद्दों के पीछे नहीं भागना चाहिए
डिग्री को लेकर सार्वजनिक रूप से जानकारी पहले से ही उपलब्ध है, इसके बावजूद ये मुद्दा उठाने पर केजरीवाल पर गुजरात हाई कोर्ट ने 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। जबकि उद्धव ठाकरे ने पूछा था कि कौन सा कॉलेज इस बात पर गर्व महसूस नहीं करना चाहेगा कि उनके कॉलेज से ही प्रधानमंत्री ने पढ़ाई की है। पवार ने रविवार को संवाददाताओं के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और मुद्रास्फीति जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है और नेताओं को गैरजरूरी मुद्दों के पीछे नहीं भागना चाहिए।
पवार ने कहा- आज कॉलेज की डिग्री का सवाल अक्सर पूछा जा रहा है। आपकी डिग्री क्या है, मेरी डिग्री क्या है। क्या ये राजनीतिक मुद्दे हैं? बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, महंगाई पर केंद्र सरकार की आलोचना करें, अन्य महत्वपूर्ण मामलों को उठाएं। धर्म और जाति के नाम पर लोगों के बीच मतभेद पैदा किए जा रहे हैं। बेमौसम बारिश ने महाराष्ट्र में फसलों को बर्बाद कर दिया है। हमें इन पर चर्चा की जरूरत है।
पवार ने पहले भी विपक्ष से अलग राह चुनी
यह पहला मौका नहीं है जब शरद पवार इस तरह विपक्ष की मुहिम की हवा निकाली हो। इससे पहले पवार अडानी समूह के समर्थन में सामने आए थे और समूह पर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट की आलोचना की थी। उनका ये रुख कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के अडानी-हिंडनबर्ग विवाद की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग की मुहिम से बिल्कुल अलग थी। हालांकि, कांग्रेस ने कहा कि पवार की पार्टी के अपने विचार हो सकते हैं लेकिन सभी विपक्षी दल अभी भी एकजुट हैं।
बहरहाल, पवार के रुख ने बता दिया है कि वह इन दो मुद्दों पर विपक्ष के साथ नहीं है। अडानी के मुद्दे पर पूरा बजट सत्र ही हंगामे की भेंट चढ़ गया था। लगभग पूरा विपक्ष जेपीसी जांच की मांग को लेकर अड़ गया था, लेकिन सरकार भी झुकने को तैयार नहीं हुई जिसके बाद पूरे सत्र में राज्यसभा में महज 24 फीसदी और लोकसभा में 34 फीसदी ही काम हुआ।
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