आम चुनाव 2024(General election 2024) के लिए राजनीतिक दल तैयारी शुरू कर चुके हैं। क्या कांग्रेस की अगुवाई में छोटे दल एक मंच पर आकर नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ ताल ठोकेंगे यह तो देखने वाली बात होगी। लेकिन जिस तरह से एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi)की तारीफ की है उससे इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि एनसीपी, कांग्रेस के साथ 2024 के आम चुनाव में साथ होगी। शरद पवार(sharad pawar) ने कहा कि हाल ही में एक नौजवान ने कन्याकुमारी से श्रीनगर तक की यात्रा की। उस यात्रा को बड़े पैमाने पर सराहना मिली। लेकिन सत्ता पक्ष को खामी ही मिली। राहुल गांधी ने हर तरह के आलोचनों की परवाह ना करते हुए अपनी यात्रा को आगे बढ़ाया।
कांग्रेस बड़ी पार्टी, अगुवाई करे
शरद पवार ने कहा कि कांग्रेस बड़ी पार्टी है और उनको लीड करना चाहिए। इसके साथ ही चीन के मुद्दे पर राहुल गांधी के रुख की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि चीन ने अपनी सीमा में बड़ी संख्या में फौज की तैनाती की है, इसके साथ ही भारत से लगी सीमा के पास आधारभूत ढांचा की स्थापना की है। राहुल गांधी यही तो कह रहे हैं। सवाल सिर्फ राहुल गांधी का नहीं है, बल्कि विपक्ष के सभी नेताओं ने चीन के मुद्दे पर एक जैसी राय रखी है।अब भारत सरकार जिस तरह से प्रतिक्रिया दे रही है उस पर विचार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर आप चुनाव की बात करें तो एक बात साफ है कि बीजेपी के खिलाफ विपक्ष को साझा मोर्चा बनाकर चुनौती देनी होगी। अगर हम ऐसा कर पाने में कामयाब होते हैं तो निश्चित तौर पर सफलता हाथ आएगी।
क्या कहते हैं जानकार
जानकारों का कहना है कि राजनीति में बयान, खासतौर से किस समय पर बयान दिए जाते हैं वो महत्वपूर्ण है। एकनाथ शिंदे गुट को जब चुनाव आयोग ने असली शिनसेना मान लिया तो उस वक्त पवार ने कहा कि अब यह तो आयोग का फैसला है लिहाजा उद्धव ठाकरे को सम्मान करते हुए जमीनी स्तर पर लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि जब उनके हाथ से कांग्रेस का सिंबल चला गया तो उन्होंने कानूनी लड़ाई से इतर जनता के बीच जाने का फैसला किया और उसका नतीजा क्या हुआ सारी दुनिया जानती है। अब यहां बात तो वो उद्धव ठाकरे की कर रहे थे लेकिन उनके उत्साहवर्धन के लिए जिस शख्सियत का नाम ले रहे थे उन्हें देश ने आयरन लेडी के तौर पर देखा था। कांग्रेस जो कि अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है उस हालात में पवार की बातों से उनके विचारों का पता चलता है और वो बात-विचार कांग्रेस के लिए संजीवनी से कम साबित नहीं होगी।
