Sharad Pawar Vs Ajit Pawar News: क्या महाराष्ट्र की सियासत में कब किसका अच्छा दिन आने वाला है, ये कोई नहीं जानता है। यहां चाचा-भतीजे का विवाद किसी से नहीं छिपा है। इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार और उनकी बेटी सहित सुप्रिया सुले सहित परिवार के अन्य सदस्य बुधवार को ‘भाऊ बीज’ मनाने के लिए महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार के पुणे जिले के बारामती स्थित आवास पहुंचे।
सुप्रिया सुले और शरद पहुंचे अजित पवार के घर
अजित की पत्नी सुनेत्रा, उनके बेटे पार्थ और जय के साथ-साथ पवार परिवार के अन्य सदस्य बारामती के काटेवाड़ी इलाके में स्थित उप मुख्यमंत्री के आवास पर एकत्र हुए। हर साल, पवार परिवार के सदस्य दिवाली के दौरान बारामती में भाई दूज या ‘भाऊ बीज’ मनाने के लिए एक साथ आते हैं। अजित पवार के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से अलग होने और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से हाथ मिलाने के बाद यह परिवार की पहली दिवाली है।
बारामती में शरद पवार के घर गए थे अजित पवार
अजित पवार ने शरद पवार (82) द्वारा स्थापित राकांपा और उसके चुनाव चिह्न पर दावा करते हुए निर्वाचन आयोग का रुख किया है। अजित पवार मंगलवार शाम को ‘दिवाली पड़वा’ मनाने के लिए बारामती में शरद पवार के घर गए। बाद में सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया मंच पर परिवार के एकत्र होने की तस्वीरें साझा कीं। बता दें, भतीजे ने पहले अपने चाचा की पार्टी दो हिस्सों में तोड़ दी और खुद भाजपा के साथ मिलकर सरकार में शामिल हो गए, डिप्टी सीएम की कुर्सी पर विराजमान हो गए और अब वो बार-बार उसी चाचा से मुलाकात करने पहुंच जाते हैं, जिन्हें उन्होंने गच्चा दे दिया था।
बार-बार मुलाकात में क्या पक रही है सियासी खिचड़ी?
महाराष्ट्र की सियासत में भी चाचा-भतीजे की जंग काफी मशहूर है। शरद पवार को उनके ही भतीजे अजित पवार ने गच्चा दे दिया और उनकी पार्टी एनसीपी के दो हिस्से हो गए। जब अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार को ऐसा झटका दिया तो हर कोई सन्न रह गया था। खुद एनसीपी सुप्रीमो को समझ नहीं आया था कि उनके साथ ये क्या हो गया। हालांकि चाचा से अलग होने के बाद भी अजित और शरद की मुलाकात होती रही। ये सवाल उठने लगे कि क्या अंदरखाने में कोई सियासी खिचड़ी पक रही है, जो भाजपा के लिए मुसीबत साबित हो जाएगी?
क्यों चाचा शरद को भतीजे अजित ने दिया गच्चा?
अजित पवार को उनकी पार्टी एनसीपी में लगातार साइडलाइन किया जा रहा था, कहीं न कहीं अजित को ये डर और दर्द सता रहा था कि शरद पवार की बेटी और उनकी चचेरी बहन सुप्रिया सुले का कद उनसे बड़ा होता जा रहा है। ऐसे में अजित पवार ने अपने चाचा से दूसरी बार बगावत कर ली और भाजपा के साथ सरकार में शामिल हो गए थे। उन्हें भाजपा ने सम्मान देते हुए उपमुख्यमंत्री पद दे दिया। कहा जाता है कि सुप्रिया सुले के चलते अजित अपने चाचा से नाराज थे। उन्होंने अपने चाचा के खिलाफ ऐसी सियासी चाल चली कि वो चारो खाने चित हो गए।
