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तेलंगाना में सुरक्षाबलों को मिली बड़ी सफलता, मुठभेड़ में 7 माओवादी ढेर

Seven Maoists Killed in Telangana: तेलंगाना में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस के साथ मुठभेड़ में सात माओवादी मारे गए हैं।

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तेलंगाना में सात माओवादी ढेर।

Seven Maoists Killed in Telangana: तेलंगाना में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस के साथ मुठभेड़ में सात माओवादी मारे गए हैं। तेलंगाना के मुलुगु जिला के एसपी डॉ. शबरीश ने बताया कि एतुरुनगरम वन क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में सात माओवादी मारे गए हैं। जानकारी के मुताबिक, यह मुठभेड़ तेलंगाना-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर चल रही है, सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन जारी है।

अधिकारियों ने बताया कि मौके से दो AK-47 और एक इंसास राइफल बरामद की गई है। बता दें, हाल ही में 22 नवंबर को छत्तीसगढ़ में हुए एक ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने 10 नक्सलियों को मार गिराया था। इसके बाद अब 7 माओवादियों का एनकाउंटर बड़ी सफलता है।

माओवादी कमांडर ढेर

पुलिस ने बताया कि एतुरनगरम के वन क्षेत्र में तलाशी अभियान के दौरान तेलंगाना पुलिस के विशिष्ट नक्सल रोधी बल ‘ग्रेहाउंड्स’ और माओवादियों के बीच यह मुठभेड़ हुई। अधिकारी ने कहा कि मारे गए माओवादियों में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) की तेलंगाना राज्य समिति (येलंडु नरसामपेट) का सचिव कुरसाम मंगू उर्फ भद्रू भी शामिल है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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