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मणिपुर में सुरक्षाबलों का एक्शन, प्रतिबंधित संगठनों के सात सदस्य गिरफ्तार; 114 हथियार बरामद

Manipur: मणिपुर में पुलिस और सुरक्षाबलों ने बड़ा एक्शन लेते हुए प्रतिबंधित संगठनों के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया है। साथ ही व्यापक अभियान चलाते हुए 114 हथियार बरामद किए हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि लमफेल से गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से 50,000 रुपये भी बरामद किए गए हैं। आपको इस कार्रवाई से जुड़ी बड़ी बातें बताते हैं।

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मणिपुर में सुरक्षाबलों का एक्शन। (फाइल फोटो)

Photo : PTI

मणिपुर में अलग-अलग अभियानों में चार प्रतिबंधित संगठनों के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रतिबंधित कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (पीडब्ल्यूजी) के दो सदस्यों को शुक्रवार को इम्फाल पश्चिम जिले के लमफेल इलाके से पकड़ा गया, जबकि इसी संगठन के एक अन्य सदस्य को बीर टिकेंद्रजीत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के गेट के पास से गिरफ्तार किया गया।

चार प्रतिबंधित संगठनों के सात सदस्यों को किया गिरफ्तार

उन्होंने बताया कि आरोपियों की पहचान मोइरंगथेम जीवन सिंह (27), लैशराम टिकेन सिंह (40) और थौदम प्रेमकुमार सिंह (38) के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि लमफेल से गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से 50,000 रुपये भी बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिबंधित कांगलेई यावोल कानबा लुप (केवाईकेएल) संगठन के दो सदस्यों को बृहस्पतिवार को तेंगनौपाल जिले में भारत-म्यांमा सीमा पर स्थित लोकचाओ नदी के पास से पकड़ा गया।

अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए उग्रवादियों की पहचान केशम नाओचा उर्फ निंगसिंगबा (38) और निंगथौजम संजय (18) के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रतिबंधित केसीपी (ताइबंगनबा) गुट के 24 वर्षीय सदस्य मयांगलाम्बम बोरिश सिंह को भी शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया। अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने एक अन्य प्रतिबंधित संगठन के एक सदस्य को गिरफ्तार किया, जिसकी पहचान निंगथौजम धनंजय के रूप में हुई।

मणिपुर में सुरक्षा बलों ने 114 हथियार बरामद किए

मणिपुर में सुरक्षा बलों ने व्यापक अभियान चलाकर 114 हथियार, परिष्कृत विस्फोटक उपकरण (आईईडी), ग्रेनेड और गोला-बारूद बरामद किए हैं। एक आधिकारिक बयान में शनिवार को यह जानकारी दी गई। यह अभियान दो सप्ताह की उस अवधि के समाप्त होने के बाद चलाया गया जिसमें लोगों को लूटे और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को स्वेच्छा से जमा करने का मौका दिया गया था।

मणिपुर के पहाड़ी और घाटी जिलों में चलाया गया अभियान

बयान में कहा गया कि सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर मणिपुर के पहाड़ी और घाटी जिलों बिष्णुपुर, सेनापति, थौबल, जिरीबाम, चंदेल, चुराचांदपुर, कांगपोकपी, इंफाल पूर्व और इंफाल पश्चिम में अभियान चलाये। अभियान के दौरान कुल 114 हथियार, आईईडी, ग्रेनेड, गोला-बारूद बरामद किए गये। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि दो सप्ताह की समय-सीमा के दौरान लोगों ने एक हजार से अधिक हथियार और गोला-बारूद स्वेच्छा से सुरक्षा बलों को सौंपे थे।

मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 20 फरवरी को हिंसा में शामिल समूहों से आग्रह किया था कि वे सुरक्षा बलों से लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को सात दिन के भीतर स्वेच्छा से सौंप दें। लोगों की मांग पर इस समय-सीमा को बढ़ाकर छह मार्च शाम चार बजे तक कर दिया गया था। प्रशासन ने यह आश्वासन दिया था कि इस अवधि में हथियार सौंपने वाले लोगों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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