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कौन है TMC नेता शाहजहां शेख? महिलाओं से यौन उत्पीड़न, ED पर हमले का आरोपी...,पढ़ें संदेशखाली कांड के सरगना शाहजहां शेख की कहानी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Feb 29, 2024, 11:56 AM IST

Who is Shahjahan Sheikh: शेख शाहजहां ने साल 2006 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। तब पश्चिम बंगाल में वामपंथी शासन था। तभी शाहजहां सीपीआई(एम) नेता मोस्लेम शेख के करीब आया और धीरे-धीरे आगे बढ़ता चला गया।

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कौन है शाहजहां शेख

Photo : Times Now Digital

Who is Shahjahan Sheikh: पश्चिम बंगाल पुलिस ने बीती रात TMC नेता शाहजहां शेख को गिरफ्तार कर लिया है। उसकी गिरफ्तारी मिनाखा की एक अज्ञात जगह से हुई है। शाहजहां शेख ईडी पर हमले के बाद करीब 55 दिन से फरार चल रहा था। उस पर संदेशखाली में जमीन हड़पने और महिलाओं के साथ यौन उत्तपीड़न का आरोप है। बता दें, शाहजहां शेख TMC के ताकतवर और प्रभावशाली नेताओं में शुमार है। सालों पहले बांग्लादेश से संदेशखाली आने के बाद उसने यहां ईंट-भट्टा पर मजदूरी की, लेकिन देखते ही देखते उसने अकूत संपत्ति जुटा ली।आइए जानते हैं शाहजहां शेख के बारे में...

ईडी पर हमले बाद हुआ था फरार शाहजहां शेख

ईडी के अधिकारियों ने 5 फरवरी को शाहजहां शेख के यहां छापेमारी की थी। यहां पहुंचने के बाद अधिकारियों ने दरवाजा खुलवाने का कई बार प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद अधिकारियों ने दरवाजा तोड़ने की कोशिश की। इसी दौरान कथित तौर पर शेख शाहजहां के समर्थक वहां पहुंच गए और अधिकारियों और सुरक्षा बलों को घेरकर उन पर हमला कर दिया। आरोप है कि हमले के बाद ईडी अधिकारियों ने पुलिस अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी।

Shahjahan Sheikh Arrested

Shahjahan Sheikh Arrested

शाहजहां शेख 2013 में सीपीआई(एम) से टीएमसी में हुआ शामिल

शेख शाहजहां ने साल 2006 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। तब पश्चिम बंगाल में वामपंथी शासन था। तभी शाहजहां सीपीआई(एम) नेता मोस्लेम शेख के करीब आया और धीरे-धीरे आगे बढ़ता चला गया। उसने पैसे की उगाही शुरू की इसके बाद शाहजहां ने मछली पालन और रियल एस्टेट कारोबार में भी कदम रखा। 2011 में जब पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार आई तो वामपंथी पार्टी से उसका मोह भंग होने लगा। 2013 में वह टीएमसी में शामिल हो गया।

शाहजहां शेख ज्योतिप्रिय मलिक और ममता का करीबी

शाहजहां शेख को पश्चिम बंगाल के राज्य मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक का काफी करीबी माना जाता है। मलिक को पहले ही राशन वितरण के करोड़ों के घोटाले में गिरफ्तार किया जा चुका है। ईडी को शक है कि शाहजहां शेख की भी इसमें संलिप्पता हो सकती है। इसको लेकर ईडी अधिकारियों ने एक रिपोर्ट दिल्ली भेज दी है। उधर, भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी का आरोप है कि शाहजहां शेख टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी का भी बेहद खास है। उसने अवैध व्यापार से करोड़ों की प्रॉपर्टी बनाई है। कई ईंट भट्टे, मछली फॉर्म और शॉपिंग कॉम्ल्पेक्स शाहजहां शेख के नाम हैं।

मजबूरी में किया गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल भाजपा के सह प्रभारी एवं भाजपा आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि कोई विकल्प नहीं बचने पर उन्हें शेख शाहजहां को गिरफ्तार कराना पड़ा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि छिपने के 50 दिन बाद शेख शाहजहां की गिरफ्तारी से ममता बनर्जी की राजनीति पर भी कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के राज में बंगाल सुरक्षित नहीं है, खासकर महिलाएं, इसलिए उन्हें सत्ता से हटाने की जरूरत है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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