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Delimitation पर कांग्रेस का बड़ा बयान; चिदंबरम ने 543 सीटों को 25 साल तक फ्रीज करने की वकालत की

पी. चिदंबरम ने कहा कि पार्टी का यह रुख लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन पर हुई चर्चाओं और तमिलनाडु विधानसभा तथा कांग्रेस कार्य समिति द्वारा पारित प्रस्तावों के अनुरूप है।

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कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम

ोकांग्रेस ने परिसीमन पर अपना रुख दोहराते हुए लोकसभा की 543 सीटों पर अगले 25 साल तक कोई बदलाव न करने (फ्रीज) का समर्थन किया है। पी. चिदंबरम ने तमिलनाडु की DMK और AIADMK से इस रुख को मिले समर्थन का भी स्वागत किया।दक्षिणी राज्यों में प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच, कांग्रेस ने फिर से कहा है कि अगले 25 सालों तक लोकसभा सीटों की कुल संख्या 543 ही रहनी चाहिए।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि पार्टी का यह रुख लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन पर हुई चर्चाओं और तमिलनाडु विधानसभा तथा कांग्रेस कार्य समिति द्वारा पारित प्रस्तावों के अनुरूप है।

'लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन, तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव और कांग्रेस कार्य समिति के प्रस्ताव-इन सभी ने एक ही रुख अपनाया है। लोकसभा की कुल 543 सीटों या तमिलनाडु के 39 निर्वाचन क्षेत्रों में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। कांग्रेस पार्टी का रुख है कि मौजूदा संख्या को अगले 25 वर्षों के लिए बरकरार रखा जाना चाहिए,' उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा।

'हमें खुशी है कि तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी (ADMK) और मुख्य विपक्षी पार्टी (DMK) भी इस रुख का समर्थन करती हैं,' चिदंबरम ने X पर एक पोस्ट में लिखा। ये टिप्पणियां ऐसे समय में आईं जब कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से परिसीमन प्रक्रिया में दक्षिणी राज्यों के हितों की सुरक्षा के लिए एक प्रस्ताव अपनाने का आग्रह किया।

परिसीमन पर कांग्रेस का क्या रुख है?

कांग्रेस का तर्क है कि लोकसभा की मौजूदा संख्या-यानी 543 चुनी हुई सीटें-को अगले 25 सालों तक नहीं बदला जाना चाहिए। चिदंबरम ने यह भी कहा कि इस दौरान तमिलनाडु के 39 चुनाव क्षेत्रों में भी कोई बदलाव नहीं होना चाहिए।यह मामला संवैधानिक परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसके तहत जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर समय-समय पर चुनाव क्षेत्रों की सीमाएं और प्रतिनिधित्व फिर से तय किए जाते हैं।

1971 की जनगणना के बाद से लोकसभा सीटों की संख्या असल में स्थिर बनी हुई है, क्योंकि राज्यों के बीच सीटों के बंटवारे पर रोक को बढ़ाने वाले संवैधानिक संशोधन किए गए थे। मौजूदा रोक 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना तक जारी रहेगी।दक्षिणी राज्यों ने चिंता जताई है कि सीटों के बंटवारे के लिए आबादी के हालिया आंकड़ों का इस्तेमाल करने से ज़्यादा आबादी वाले राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है, जबकि जिन राज्यों ने आबादी को काफी हद तक स्थिर कर लिया है, उनका हिस्सा अपेक्षाकृत कम हो सकता है।

शिवकुमार ने 1971 के आधार और 543 सीटों की संख्या को बनाए रखने की मांग की

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में शिवकुमार ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया में 1971 की जनसंख्या के आधार का सम्मान किया जाना चाहिए।इस बैठक में तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ सी. जोसेफ विजय, वी.डी. सतीसन और एन. चंद्रबाबू नायडू समेत कई अन्य लोग शामिल हुए।

शिवकुमार ने कहा, 'हम इस आश्वासन का स्वागत करते हैं कि किसी भी दक्षिणी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी। लेकिन प्रतिनिधित्व का मतलब सिर्फ़ संख्या नहीं है। यह अहमियत और आवाज़ की बात है।' उन्होंने तर्क दिया कि जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए दक्षिणी राज्यों को सज़ा नहीं मिलनी चाहिए।

'उस कामयाबी की वजह से हमारी आवाज़ कभी कमजोर नहीं होनी चाहिए'

उन्होंने कहा, 'उस कामयाबी की वजह से हमारी आवाज़ कभी कमज़ोर नहीं होनी चाहिए। हमारी आर्थिक ताकत के साथ-साथ हमारी राजनीतिक आवाज़ भी मजबूत होनी चाहिए।'शिवकुमार ने यह भी कहा कि लोकसभा की कुल सदस्य संख्या में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए।उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि यहाँ मौजूद सभी मुख्यमंत्री मेरी बात का समर्थन करेंगे। 1971 के आधार का सम्मान किया जाना चाहिए और हमारी आवाज की ताकत को सुरक्षित रखा जाना चाहिए।'

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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