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सलाखों की कैद से रिहा हुए आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम, जेल के बाहर लगा सपा नेताओं का जमावड़ा

Abdullah Azam Khan released from jail: समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आजम खान के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान जेल से रिहा हो गए है। अब्दुल्ला के जेल से रिहा होने पर सपा सांसद रुचि वीरा समेत कई नेता हरदोई पहुंचे। 16 महीने 3 दिन तक अब्दुल्ला आजम हरदोई जिला जेल में रहे।

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हरदोई जिला कारागार से रिहा हुए अब्दुल्ला आजम खान।

समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अब्दुल्ला आजम खान मंगलवार को हरदोई जिला कारागार से रिहा हुए। अब्दुल्ला आजम कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जेल के द्वार से बाहर आये। वह किसी से मिले बिना और मीडिया से बात किये बिना रामपुर के लिए रवाना हो गए। अब्दुल्ला आज़म सपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री आजम खान के बेटे हैं जो विभिन्न मामलों के तहत सीतापुर की जेल में बंद हैं।

जेल के बाहर पहुंची समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा

अब्‍दुल्‍ला आजम की रिहाई की खबर सुनकर मुरादाबाद की सपा सांसद रुचि वीरा समेत कई नेता और कार्यकर्ता हरदोई जेल के बाहर पहुंच गये। रुचि वीरा ने न्यायपालिका में अपना विश्वास व्यक्त करते हुए कहा, 'हमें हमेशा से न्यायपालिका पर भरोसा था और आगे भी रहेगा। आज न्याय हुआ है और हमें उम्मीद है कि भविष्य में भी न्याय होगा।'

सुप्रीन कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम खान को दी थी जमानत

अब्दुल्ला आजम खान को हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने जमानत दी थी। लेकिन रामपुर में सांसद-विधायक अदालत के समक्ष एक अलग मामले में लंबित कानूनी औपचारिकताओं के कारण वह अभी भी जेल में थे। पिछले कुछ सालों में उनके खिलाफ 45 मामले दर्ज हुए थे और सभी में उन्हें जमानत मिल गई थी। जमानत सत्यापन से संबंधित प्रक्रियागत मुद्दों के कारण उनकी रिहाई में देरी हुई। सोमवार को सांसद-विधायक अदालत से रिहाई का आदेश हरदोई जेल भेजा गया, जिससे उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ।

कब से कब तक हरदोई जेल में बंद रहे अब्दुल्ला आजम खान?

हरदोई जिला जेल में अब्दुल्ला आजम 16 महीने 3 दिन रहे। कोर्ट ने अब्दुल्ला को अक्टूबर 2023 में जन्म प्रमाण पत्र के मामले में सात साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद से सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को रामपुर जेल और वहां से हरदोई जेल शिफ्ट किया गया था। जब कभी पूर्व विधायक की पेशी होती थी, तो कड़ी सुरक्षा में उन्हें रामपुर भेजा जाता रहा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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