RSS Centenary Event: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को मुंबई में संघ के शताब्दी समारोह के तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान, फिल्मकार सुभाष घई और गीतकार, कवि एवं लेखक प्रसून जोशी भी मौजूद रहे।
सलमान खान ने मोहन भागवत की बात बड़े ध्यान से सुना, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संघ किसी का विरोध किए बिना देश के लिए काम करता है, राष्ट्रीय एकता पर ध्यान केंद्रित करता है और सत्ता की लालसा किए बिना कार्य करता है।
क्या कुछ बोले मोहन भागवत?
संघ प्रमुख ने कहा कि संघ किसी के ''खिलाफ'' नहीं है और ना ही वह सत्ता या लोकप्रियता चाहता है। उन्होंने कहा, "हालांकि फिर भी यह देखा जा रहा है कि समाज को दिशा देने और अनुकूल वातावरण बनाने का काम नहीं हो रहा है।" भागवत ने कहा, ''आरएसएस किसी के खिलाफ नहीं है और किसी घटना की प्रतिक्रिया के रूप में काम नहीं करता है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य देश में जारी सकारात्मक प्रयासों का समर्थन और उन्हें मजबूत करना है।''
'राजनीति में शामिल नहीं है RSS'
भगवत ने कहा कि संघ कोई अर्धसैनिक बल नहीं है, भले ही वह नियमित 'पथ संचलन' करता है और उसके स्वयंसेवक लाठी चलाते हैं, लेकिन इसे एक अखाड़े के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरएसएस राजनीति में भी शामिल नहीं है। हालांकि, संघ से जुड़े कुछ लोग राजनीतिक जीवन में सक्रिय हैं।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने वर्ष 1925 में आरएसएस की स्थापना से पहले के देश की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक "सुरक्षा वाल्व" के रूप में स्थापित किया, लेकिन भारतीयों ने इसे स्वतंत्रता संग्राम का शक्तिशाली साधन बना दिया। भागवत ने आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार का उल्लेख करते हुए उनके बचपन की कठिन परिस्थितियों का वर्णन किया, जिसमें 13 वर्ष की उम्र में प्लेग से माता-पिता का निधन और उसके बाद हुई आर्थिक कठिनाइयां शामिल थीं।
भागवत ने कहा कि हेडगेवार ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसमें उनके स्कूल के दिनों में वंदे मातरम् आंदोलन भी शामिल था। भागवत ने कहा कि जब उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की, तो नागपुर के कुछ लोगों ने उन्हें मेडिकल की पढ़ाई के लिए कोलकाता भेजने हेतु धन जुटाया, जहां वह क्रांतिकारी समूहों के सम्पर्क में आये।
