ममता बनर्जी की ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (MAITC) के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने एक आरटीआई (RTI) आवेदन के जवाब का हवाला देते हुए भारत निर्वाचन आयोग पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आयोग देश भर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर और उसके एल्गोरिदम से जुड़ी अहम जानकारियां जानबूझकर छिपा रहा है।
साकेत गोखले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी आरटीआई अर्जी और निर्वाचन आयोग की ओर से मिला लिखित जवाब साझा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि एक सार्वजनिक संस्था द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर और उसकी टेंडर प्रक्रिया को आखिर किस कंपनी के 'व्यावसायिक हितों' या 'व्यापारिक गोपनीयता' की रक्षा के नाम पर गोपनीय रखा जा रहा है?
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तृणमूल सांसद ने इसी साल 17 अप्रैल को एक आरटीआई दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 'एरोनेट' (ERONET) प्रणाली में इस्तेमाल हुए एल्गोरिदम, तकनीकी दस्तावेज, सॉफ्टवेयर की खरीद-विकास, गड़बड़ियों को पकड़ने के नियम और प्रमाणीकरण रिपोर्ट की जानकारी मांगी थी। बता दें कि 'एरोनेट' निर्वाचन आयोग की वह केंद्रीकृत प्रणाली है, जो पूरे देश का मतदाता डेटाबेस संभालती है।
इसके जवाब में निर्वाचन आयोग ने 21 जुलाई को स्पष्ट किया था कि मांगी गई जानकारी आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(डी) के तहत आती है, जिसे सार्वजनिक करने से छूट प्राप्त है। इस धारा के अंतर्गत व्यावसायिक विश्वास, व्यापारिक गोपनीयता और बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) जैसे विषयों को सुरक्षित रखा जाता है।
गोखले ने इस तर्क को खारिज करते हुए पूछा कि जब यह काम सार्वजनिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा है, तो इसमें किसी निजी कंपनी का व्यापारिक हित कैसे आ सकता है? गौरतलब है कि यह नया विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब एक दिन पहले ही अंग्रेजी समाचार पत्र 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्तों-सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने खुद देश में मतदाता सूची के एसआईआर के दौरान नाम जोड़े जाने और हटाए जाने से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां जताई थीं।
