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'जीवन खटाखट नहीं, यहां कड़ी मेहनत की जरूरत...' राहुल गांधी पर जयशंकर ने किया कटाक्ष

S Jaishankar on Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी जीतती है तो वह देश के हर गरीब परिवार की एक महिला के खाते में एक लाख रुपए हस्तांतरित करेगी। उन्होंने कहा था कि ये रुपये खटाखट यानी तुरंत हस्तांतरित होंगे। अब जयशंकर ने उनके इस बयान को लेकर कटाक्ष किया है।

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एस जयशंकर का राहुल गांधी पर कटाक्ष।

Photo : Twitter

S Jaishankar on Rahul Gandhi: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कटाक्ष किया है। उन्होंने जिनेवा में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए लोकसभा में राहुल गांधी के खटाखट वाले बयान को निशाना बनाया। एस जयशंकर ने कहा कि व्यक्ति को कड़ी मेहनत करने की जरूरत होती और जीवन खटाखट नहीं है। दरअसल, जयशंकर जिनेवा में भारतीय समुदाय को संबोधित कर रहे थे।

जयशंकर बदलते भारत और नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा पिछले 10 वर्षों में किए गए बुनियादी ढांचे के विकास के बारे में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता की टिप्पणी का परोक्ष संदर्भ दिया। जयशंकर ने बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए आवश्यक विशाल मानव संसाधनों के बारे में बात करते हुए कहा, जब तक हम मानव संसाधन विकसित नहीं कर लेते, तब तक कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है। जब तक आप बुनियादी ढांचे का निर्माण नहीं कर लेते, जब तक आपके पास नीतियां नहीं होतीं। इसलिए जीवन खटाखट नहीं है। जीवन में कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। जीवन कर्मठता है।

हमें कड़ी मेहतन करनी होगी

उन्होंने कहा, जिस किसी ने भी नौकरी की है और कड़ी मेहनत से काम किया है, वह यह जानता है। इसलिए मेरा आपके लिए यही संदेश है कि हमें इस पर कड़ी मेहनत करनी होगी। उन्होंने कहा, अक्सर चीन से आयात पर सवाल उठते हैं कि हम उनसे इतना आयात क्यों करते हैं। दरअसल, पहले की सरकारों ने मैन्युफक्चरिंग पर कोई ध्यान नहीं दिया। मजबूत मैन्युफैक्चरिंग के बिना आप प्रमुख वैश्विक ताकत कैसे बन पाएंगे? उन्होंने कहा, जब हमने इसका हल खोजने की कोशिश की तो पता चला कि हमारे पास संसाधन नहीं हैं और हमें कोशिश नहीं करनी चाहिए।

राहुल गांधी ने दिया था खटाखट वाला बयान

इस साल लोकसभा चुनाव के लिए अभियान के तहत एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी जीतती है तो वह देश के हर गरीब परिवार की एक महिला के खाते में एक लाख रुपए हस्तांतरित करेगी। उन्होंने कहा था कि ये रुपये खटाखट यानी तुरंत हस्तांतरित होंगे। राहुल गांधी के इस बयान की काफी चर्चा हुई थी। भाजपा ने इसको लेकर उन पर कई हमले भी किए थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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