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राज्यसभा में सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हंगामा, जगदीप धनखड़ बोले- देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दूंगा

Ruckus in Rajya Sabha: राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर एक बार फिर हंगामा हुआ। इस बीच सदन की कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्ष को जवाब देते हुए जगदीप धनखड़ ने कहा कि आप संविधान का अपमान कर रहे हैं।

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जगदीप धनखड़ vs मल्लिकार्जुन खड़गे

Jagdeep Dhankhar vs Mallikarjun Kharge in Rajya Sabha: राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को पद से हटाने संबंधी मुद्दे पर शुक्रवार को राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर जमकर हंगामा हुआ। हंगामे के बाद उच्च सदन की कार्यवाही 11 बज कर 50 मिनट पर दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।

धनखड़ ने कहा- देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दूंगा

सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, "मैं किसान का बेटा हूं, मैं कमजोरी नहीं दिखाऊंगा। मैं अपने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दूंगा। आपको (विपक्ष को) 24 घंटे एक ही काम है, किसान का बेटा यहां क्यों बैठा है। देखिए आप क्या कह रहे हैं। मैंने बहुत कुछ सहन किया है। आपको प्रस्ताव लाने का अधिकार है, लेकिन आप संविधान का अपमान कर रहे हैं।"

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने सभापति धनखड़ को दिया जवाब

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "आप (भाजपा) सदस्यों को दूसरे दलों के सदस्यों के खिलाफ बोलने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। मैं भी किसान का बेटा हूं। मैंने आपसे ज्यादा चुनौतियों का सामना किया है। आप हमारी पार्टी के नेताओं का अपमान कर रहे हैं, आप कांग्रेस का अपमान कर रहे हैं। हम यहां आपकी तारीफ सुनने नहीं आए हैं, हम यहां चर्चा करने आए हैं।" इसके बाद सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।

वहीं लोकसभा में ‘भारत के संविधान की 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा’ पर चर्चा शुरू हो गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में संविधान पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि संविधान सभा द्वारा तैयार संविधान सिर्फ कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है ।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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