RJD big defeat in Bihar Election 2025: बिहार में चुनाव नतीजे ऐसे आएंगे इसकी किसी को भी उम्मीद नहीं थी। एग्जिट पोल्स ने एनडीए की जीत का अनुमान जताया था लेकिन यह जीत इतनी प्रचंड और सुनामी वाली होगी इसका अनुमान खुद राजग के दलों को भी नहीं था। बिहार चुनाव के इस प्रचंड जनादेश से एनडीए जहां उत्साह और नई ऊर्जा से भर गया है, वहीं, महागठबंधन की अगुवाई करने वाले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में मायूसी और हताशा फैली है। राजद और उसके नेता तेजस्वी यादव इस चुनाव में अपनी जीत मानकर चल रहे थे। तेजस्वी ने तो बकायदा सीएम पद पर अपने शपथ की तिथि 18 नवंबर घोषित कर दी थी लेकिन चुनाव नतीजों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
2010 में राजद को मिली थीं महज 22 सीटें
चुनाव में राजद की स्थिति क्या थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तेजस्वी खुद अपनी सीट किसी तरह से बचा पाए। राघोपुर सीट पर भाजपा उम्मीदवार सतीश कुमार के सात उनकी रस्साकशी चलती रही। अंतिम दौर तक चले इस कड़े मुकाबले में तेजस्वी ने 14532 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। पिछली बार के मुकाबले तेजस्वी की जीत का अंतर काफी कम रहा। राजद की अगर बात करें तो उसे बहुत बड़ा झटका लगा है। साल 1997 में राजद का गठन हुआ और इसके बाद उसने कई चुनाव लड़े और जीते। उसकी हार भी हुई लेकिन यह पराजय बहुत बड़ी है। अपने 28 साल के इतिहास में राजद की यह दूसरी बड़ी हार है। इस बार उसने 142 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन जीत केवल 26 सीटों पर मिली। इससे पहले राजद की सबसे बड़ी पराजय 2010 के विधानसभा चुनाव में हुई। इस चुनाव में उसे 22 सीटें ही मिली थीं।
शनिवार को अपनी हार की समीक्षा करेगा राजद
2025 की इस हार पर राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी शनिवार को बैठक कर बिहार विधानसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन की विस्तार से समीक्षा करेगी। शुक्रवार को विधानसभा चुनाव की मतगणना में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की जीत और राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन के खराब प्रदर्शन के बाद उन्होंने यह बात कही है। सिद्दीकी ने पत्रकारों से कहा, 'हम कल बैठक कर नतीजों का विश्लेषण करेंगे। क्या गलत हुआ, हमारी कमियां क्या रहीं। जो भी कहना होगा, हम कल कहेंगे।'
2020 में राजद बनी थी सबसे बड़ी पार्टी
शुरुआती रुझान दोपहर तक महागठबंधन और राजद की बड़ी हार का संकेत देने लगे थे। 2020 में सबसे बड़ी पार्टी बनने वाली राजद के लिए ये नतीजे गहरा झटका रहे। पूर्व छात्र नेता निशांत यादव ने कहा, ‘हम बहुत निराश हैं। हम तेजस्वी यादव को मौका देना चाहते थे, लेकिन रुझान हमारे पक्ष में नहीं हैं।’भाजपा कार्यालय में जश्न के बीच, फिल्म अभिनेता फूल सिंह ‘विजय रथ’ पर सवार होकर पहुंचे और बोले, ‘जहां-जहां मोदी जी जीतेंगे, मेरा रथ जाएगा—आज बिहार, कल झारखंड!’ दोपहर तक वीरचंद पटेल पथ दो विपरीत दृश्यों में विभाजित था—एक ओर केसरिया और हरे रंग की खुशी, दूसरी ओर लाल और सफेद रंग में घिरी मायूसी। हर पटाखा, हर नारा और ढोलक की हर थाप यही संकेत दे रही थी कि बिहार ने बदलाव नहीं, बल्कि निरंतरता का रास्ता चुना है।
